कलाकार विंग · कलाकार-पट्टिका · Artist Plate
नौशाद
Naushad
जन्म25 December 1919 — लखनऊ
निधन5 May 2006 — Mumbai
जीवन-पट्टी
The Life Specimen| नाम | नौशाद · Naushad |
|---|---|
| जन्म | 25 December 1919 — लखनऊ · Lucknow |
| निधन | 5 May 2006 — Mumbai |
| भूमिकाएँ | रचनाकार |
| सक्रिय वर्ष | 1940–2005 |
| युग | golden-era |
| विधाएँ | फ़िल्मी · ग़ज़ल · Folk-Inflected · शास्त्रीय · Thumri-Inflected |
| भाषाएँ | hindi · urdu · hindi-urdu |
पट्टिका-लेख
The Monographजीवनी Biography
नौशाद अली (1919–2006) हिंदी फ़िल्म-संगीत के सबसे प्रतिष्ठित वास्तुकारों में हैं — वह संगीतकार जिसने उत्तर भारत की ठुमरी-दादरा, अवध की लोक-धुनों और शास्त्रीय रागदारी को बम्बई के आर्केस्ट्रा से जोड़कर 'गोल्डन एरा' की भव्य ध्वनि रची। लखनऊ से भागकर बम्बई आए; जूते सिलवाने तक के दिन देखे; 'रतन' (1944) ने रातोंरात युग बदला — और फिर 'अनमोल घड़ी', 'शाहजहाँ', 'दर्द', 'दुलारी', 'अंदाज़', 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', 'मुग़ल-ए-आज़म' तक वह सिलसिला चला जिसमें रफ़ी-लता-शमशाद की आवाज़ें अपने शिखर छूती रहीं। राग-आधारित गीत को जन-गीत बनाने की कला में नौशाद आज भी पाठ्यक्रम हैं।
प्रारंभिक जीवन Early Life
लखनऊ में जन्म; घरवालों की मर्ज़ी के विरुद्ध हारमोनियम और शहर की महफ़िल-संस्कृति आत्मसात की; 1937 में बम्बई पहुँचकर साज़ सुधारे और संगीतकारों की संगत की।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Born in Lucknow; absorbed harmonium and the city's mehfil culture against his family's wishes, repaired instruments and assisted composers after reaching Bombay in 1937.
करियर Career
'प्रेम नगर' (1940) से स्वतंत्र; 'रतन' (1944) से युगांतर; 1940 के दशक में महबूब–कारदार धुरी; राग-महाकाव्य वर्ष ('बैजू बावरा' 1952, 'मुग़ल-ए-आज़म' 1960); पैंसठ बरसों में लगभग पैंसठ फ़िल्में — संख्या पर गुणवत्ता की जीत।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Independent from Prem Nagar (1940); breakthrough Rattan (1944); the Mehboob–Kardar axis through the 1940s; the raag-epic years (Baiju Bawra 1952, Mughal-e-Azam 1960); roughly 65 films in 65 years — quality held above quantity.
विरासत Legacy
दादासाहेब फाल्के (1981); राग को बॉक्स-ऑफ़िस की ताक़त बनाने वाले पहले संगीतकार; लोक-धुन पर आर्केस्ट्रा वाला नौशादी व्याकरण 1950 के दशक के हर प्रतिद्वंद्वी की पाठशाला बना।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Dadasaheb Phalke (1981); the first composer to make the raag a box-office force; the Naushad orchestra-with-folk grammar shaped every 1950s rival.
गायन-शैली Musical Style
यूपी की लोक-रीढ़, शास्त्रीय अनुशासन, आर्केस्ट्रा का वैभव — और बंदोबस्त से ऊपर सदा सिंहासन पर आवाज़।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
UP folk spine, classical discipline, orchestral grandeur — and the voice always enthroned above the arrangement.
तालीम, विधाएँ और भाषाएँ
Training · Genres · Languagesतालीम · Training
उस्ताद ग़ुरबत अली / यूसुफ़ अली (लखनऊ, विवरण-अनुसार)
लखनवी महफ़िल-रंग; स्वयं-गढ़ा वाद्य-विन्यास
विधाएँ · Genres
भाषाएँ · Languages Sung
जीवन-रेखा
Career Highlights- 1944 'रतन' — वह धमाका जिसने फ़िल्म-संगीत का मोल बदल दिया Rattan — the breakthrough that re-priced film music
- 1946 एक ही बरस 'अनमोल घड़ी' और 'शाहजहाँ' — नूरजहाँ और सहगल के शिखर Anmol Ghadi and Shahjehan in one year — Noor Jehan's and Saigal's peaks
- 1949 'अंदाज़' और 'दुलारी' — उन्हीं की छड़ी तले लता-रफ़ी युग का उद्घाटन Andaz and Dulari — the Lata–Rafi era opens under his baton
- 1952 'बैजू बावरा' — रागदारी बतौर ब्लॉकबस्टर Baiju Bawra — raagdari as blockbuster
- 1981 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार Dadasaheb Phalke Award
अन्य विवरण
More Details- Birth Year
- 1919
- Death Year
- 2006
- Active Years
- 1940–2005
Early Life
लखनऊ में जन्म; घरवालों की मर्ज़ी के विरुद्ध हारमोनियम और शहर की महफ़िल-संस्कृति आत्मसात की; 1937 में बम्बई पहुँचकर साज़ सुधारे और संगीतकारों की संगत की।
Born in Lucknow; absorbed harmonium and the city's mehfil culture against his family's wishes, repaired instruments and assisted composers after reaching Bombay in 1937.
Career
'प्रेम नगर' (1940) से स्वतंत्र; 'रतन' (1944) से युगांतर; 1940 के दशक में महबूब–कारदार धुरी; राग-महाकाव्य वर्ष ('बैजू बावरा' 1952, 'मुग़ल-ए-आज़म' 1960); पैंसठ बरसों में लगभग पैंसठ फ़िल्में — संख्या पर गुणवत्ता की जीत।
Independent from Prem Nagar (1940); breakthrough Rattan (1944); the Mehboob–Kardar axis through the 1940s; the raag-epic years (Baiju Bawra 1952, Mughal-e-Azam 1960); roughly 65 films in 65 years — quality held above quantity.
Legacy
दादासाहेब फाल्के (1981); राग को बॉक्स-ऑफ़िस की ताक़त बनाने वाले पहले संगीतकार; लोक-धुन पर आर्केस्ट्रा वाला नौशादी व्याकरण 1950 के दशक के हर प्रतिद्वंद्वी की पाठशाला बना।
Dadasaheb Phalke (1981); the first composer to make the raag a box-office force; the Naushad orchestra-with-folk grammar shaped every 1950s rival.
Musical Style
यूपी की लोक-रीढ़, शास्त्रीय अनुशासन, आर्केस्ट्रा का वैभव — और बंदोबस्त से ऊपर सदा सिंहासन पर आवाज़।
UP folk spine, classical discipline, orchestral grandeur — and the voice always enthroned above the arrangement.
अभिलेख-सार
Discography Summary| संग्रह में गीत | 24 — नीचे जुड़े हुए पन्नों में सूचीबद्ध |
|---|---|
| कुल ज्ञात रिकॉर्डिंग | 15 — 15 संग्रह में उपलब्ध |
| रिकॉर्डिंग-काल | 1944–1950 · पहला सत्र 1944 |
| फ़िल्में व डिस्क | Rattan 1944 · Anmol Ghadi 1946 · Shahjehan 1946 · Babul 1950 · Dard 1947 · Mela 1948 |
| प्रमुख भूमिका | संगीतकार |
| नित्य सहयोगी | Shakeel Badayuni · Kavi Dina Nath Madhok · Zohrabai Ambalewali · Noor Jehan |
| हस्ताक्षर-गीत | Ankhiyan Milake Naina Se Naina · Sawan Ke Badlo Rut Hai Suhani · Awaz De Kahan Hai · Gham Diye Mustaqil · Jab Dil Hi Toot Gaya |
| स्रोत | derived from the HindiGeet song archive |
जुड़े हुए पन्ने
Connected Plates · The Graph Made Visibleअटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — नौशाद से उनके गीत, फ़िल्में, घराना, समकालीन और युग, सब यहाँ से खुलते हैं।
हस्ताक्षर-गीत · Signature Songs
फ़िल्में · The Films
युग · The Era
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