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Naushad
नौशाद — रचनाकार wikipedia · CC BY 3.0

कलाकार विंग · कलाकार-पट्टिका · Artist Plate

नौशाद

Naushad

भूमिकारचनाकारयुगgolden-eraसक्रिय1940–2005जीवन1919–2006संग्रह में24 गीत

जन्म25 December 1919 — लखनऊ

निधन5 May 2006 — Mumbai

जीवन-पट्टी

The Life Specimen
जीवन-नमूना · Life Specimen
नामनौशाद · Naushad
जन्म25 December 1919 — लखनऊ · Lucknow
निधन5 May 2006 — Mumbai
भूमिकाएँरचनाकार
सक्रिय वर्ष1940–2005
युगgolden-era
विधाएँफ़िल्मी · ग़ज़ल · Folk-Inflected · शास्त्रीय · Thumri-Inflected
भाषाएँhindi · urdu · hindi-urdu

पट्टिका-लेख

The Monograph

जीवनी Biography

नौशाद अली (1919–2006) हिंदी फ़िल्म-संगीत के सबसे प्रतिष्ठित वास्तुकारों में हैं — वह संगीतकार जिसने उत्तर भारत की ठुमरी-दादरा, अवध की लोक-धुनों और शास्त्रीय रागदारी को बम्बई के आर्केस्ट्रा से जोड़कर 'गोल्डन एरा' की भव्य ध्वनि रची। लखनऊ से भागकर बम्बई आए; जूते सिलवाने तक के दिन देखे; 'रतन' (1944) ने रातोंरात युग बदला — और फिर 'अनमोल घड़ी', 'शाहजहाँ', 'दर्द', 'दुलारी', 'अंदाज़', 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', 'मुग़ल-ए-आज़म' तक वह सिलसिला चला जिसमें रफ़ी-लता-शमशाद की आवाज़ें अपने शिखर छूती रहीं। राग-आधारित गीत को जन-गीत बनाने की कला में नौशाद आज भी पाठ्यक्रम हैं।

प्रारंभिक जीवन Early Life

लखनऊ में जन्म; घरवालों की मर्ज़ी के विरुद्ध हारमोनियम और शहर की महफ़िल-संस्कृति आत्मसात की; 1937 में बम्बई पहुँचकर साज़ सुधारे और संगीतकारों की संगत की।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Born in Lucknow; absorbed harmonium and the city's mehfil culture against his family's wishes, repaired instruments and assisted composers after reaching Bombay in 1937.

करियर Career

'प्रेम नगर' (1940) से स्वतंत्र; 'रतन' (1944) से युगांतर; 1940 के दशक में महबूब–कारदार धुरी; राग-महाकाव्य वर्ष ('बैजू बावरा' 1952, 'मुग़ल-ए-आज़म' 1960); पैंसठ बरसों में लगभग पैंसठ फ़िल्में — संख्या पर गुणवत्ता की जीत।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Independent from Prem Nagar (1940); breakthrough Rattan (1944); the Mehboob–Kardar axis through the 1940s; the raag-epic years (Baiju Bawra 1952, Mughal-e-Azam 1960); roughly 65 films in 65 years — quality held above quantity.

विरासत Legacy

दादासाहेब फाल्के (1981); राग को बॉक्स-ऑफ़िस की ताक़त बनाने वाले पहले संगीतकार; लोक-धुन पर आर्केस्ट्रा वाला नौशादी व्याकरण 1950 के दशक के हर प्रतिद्वंद्वी की पाठशाला बना।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Dadasaheb Phalke (1981); the first composer to make the raag a box-office force; the Naushad orchestra-with-folk grammar shaped every 1950s rival.

गायन-शैली Musical Style

यूपी की लोक-रीढ़, शास्त्रीय अनुशासन, आर्केस्ट्रा का वैभव — और बंदोबस्त से ऊपर सदा सिंहासन पर आवाज़।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

UP folk spine, classical discipline, orchestral grandeur — and the voice always enthroned above the arrangement.

तालीम, विधाएँ और भाषाएँ

Training · Genres · Languages

तालीम · Training

उस्ताद ग़ुरबत अली / यूसुफ़ अली (लखनऊ, विवरण-अनुसार)

लखनवी महफ़िल-रंग; स्वयं-गढ़ा वाद्य-विन्यास

विधाएँ · Genres

फ़िल्मी ग़ज़ल Folk-Inflected शास्त्रीय Thumri-Inflected

भाषाएँ · Languages Sung

hindi urdu hindi-urdu

जीवन-रेखा

Career Highlights
  1. 1944 'रतन' — वह धमाका जिसने फ़िल्म-संगीत का मोल बदल दिया Rattan — the breakthrough that re-priced film music
  2. 1946 एक ही बरस 'अनमोल घड़ी' और 'शाहजहाँ' — नूरजहाँ और सहगल के शिखर Anmol Ghadi and Shahjehan in one year — Noor Jehan's and Saigal's peaks
  3. 1949 'अंदाज़' और 'दुलारी' — उन्हीं की छड़ी तले लता-रफ़ी युग का उद्घाटन Andaz and Dulari — the Lata–Rafi era opens under his baton
  4. 1952 'बैजू बावरा' — रागदारी बतौर ब्लॉकबस्टर Baiju Bawra — raagdari as blockbuster
  5. 1981 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार Dadasaheb Phalke Award

अन्य विवरण

More Details
Birth Year
1919
Death Year
2006
Active Years
1940–2005

Early Life

लखनऊ में जन्म; घरवालों की मर्ज़ी के विरुद्ध हारमोनियम और शहर की महफ़िल-संस्कृति आत्मसात की; 1937 में बम्बई पहुँचकर साज़ सुधारे और संगीतकारों की संगत की।

Born in Lucknow; absorbed harmonium and the city's mehfil culture against his family's wishes, repaired instruments and assisted composers after reaching Bombay in 1937.

Career

'प्रेम नगर' (1940) से स्वतंत्र; 'रतन' (1944) से युगांतर; 1940 के दशक में महबूब–कारदार धुरी; राग-महाकाव्य वर्ष ('बैजू बावरा' 1952, 'मुग़ल-ए-आज़म' 1960); पैंसठ बरसों में लगभग पैंसठ फ़िल्में — संख्या पर गुणवत्ता की जीत।

Independent from Prem Nagar (1940); breakthrough Rattan (1944); the Mehboob–Kardar axis through the 1940s; the raag-epic years (Baiju Bawra 1952, Mughal-e-Azam 1960); roughly 65 films in 65 years — quality held above quantity.

Legacy

दादासाहेब फाल्के (1981); राग को बॉक्स-ऑफ़िस की ताक़त बनाने वाले पहले संगीतकार; लोक-धुन पर आर्केस्ट्रा वाला नौशादी व्याकरण 1950 के दशक के हर प्रतिद्वंद्वी की पाठशाला बना।

Dadasaheb Phalke (1981); the first composer to make the raag a box-office force; the Naushad orchestra-with-folk grammar shaped every 1950s rival.

Musical Style

यूपी की लोक-रीढ़, शास्त्रीय अनुशासन, आर्केस्ट्रा का वैभव — और बंदोबस्त से ऊपर सदा सिंहासन पर आवाज़।

UP folk spine, classical discipline, orchestral grandeur — and the voice always enthroned above the arrangement.

अभिलेख-सार

Discography Summary
हिंदीगीत संग्रह से · From the HindiGeet Archive
संग्रह में गीत24 — नीचे जुड़े हुए पन्नों में सूचीबद्ध
कुल ज्ञात रिकॉर्डिंग15 — 15 संग्रह में उपलब्ध
रिकॉर्डिंग-काल1944–1950 · पहला सत्र 1944
फ़िल्में व डिस्कRattan 1944 · Anmol Ghadi 1946 · Shahjehan 1946 · Babul 1950 · Dard 1947 · Mela 1948
प्रमुख भूमिकासंगीतकार
नित्य सहयोगीShakeel Badayuni · Kavi Dina Nath Madhok · Zohrabai Ambalewali · Noor Jehan
हस्ताक्षर-गीतAnkhiyan Milake Naina Se Naina · Sawan Ke Badlo Rut Hai Suhani · Awaz De Kahan Hai · Gham Diye Mustaqil · Jab Dil Hi Toot Gaya
स्रोतderived from the HindiGeet song archive

जुड़े हुए पन्ने

Connected Plates · The Graph Made Visible

अटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — नौशाद से उनके गीत, फ़िल्में, घराना, समकालीन और युग, सब यहाँ से खुलते हैं।

युग · The Era

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