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रसूलन बाई — गायक wikimedia · Public domain

कलाकार विंग · कलाकार-पट्टिका · Artist Plate

रसूलन बाई

Rasoolan Bai

भूमिकागायकजीवन1974संग्रह में3 गीत

जन्मPratapgarh, United Provinces (now Uttar Pradesh), India

निधन1974

जीवन-पट्टी

The Life Specimen
जीवन-नमूना · Life Specimen
नामरसूलन बाई · Rasoolan Bai
जन्मPratapgarh, United Provinces (now Uttar Pradesh), India
निधन1974
भूमिकाएँगायक
विधाएँठुमरी · दादरा · होली · Seasonal
भाषाएँbraj

पट्टिका-लेख

The Monograph

जीवनी Biography

रसूलन बाई (1902–1974) बनारस की पूरब-अंग ठुमरी की सम्राज्ञी थीं — वह आवाज़ जिसमें टप्पे की फुर्ती और ठुमरी की टीस एक साथ रहती थी। मिर्ज़ापुर में जन्म, बनारस की संगीत-परंपरा में तालीम; 'फूल गेंदवा न मारो' उनके नाम का पर्याय बना। एआईआर की नियमित कलाकार; 1969 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान। 1947 और 1969 के दंगों में घर खोया; अंतिम वर्ष कठिनाई में — भारतीय संगीत की सबसे मार्मिक कथाओं में।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

रसूलन बाई (1902–1974) बनारस की पूरब-अंग ठुमरी की सम्राज्ञी थीं — वह आवाज़ जिसमें टप्पे की फुर्ती और ठुमरी की टीस एक साथ रहती थी। मिर्ज़ापुर में जन्म, बनारस की संगीत-परंपरा में तालीम; 'फूल गेंदवा न मारो' उनके नाम का पर्याय बना। बीबीसी और एआईआर की नियमित कलाकार; 1969 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान। 1947 और फिर 1969 के दंगों में घर-गृहस्थी खोई; अंतिम वर्ष कठिनाई में बीते — उनकी कथा भारतीय संगीत की सबसे मार्मिक कथाओं में है।

विरासत Legacy

उनके तवे आज भी पूरब-अंग की कसौटी हैं; गिरिजा देवी और बनारस-परंपरा ने उनका बोल-बनाव जीवित रखा।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Her records remain the reference purab-ang; Girija Devi and the Banaras line kept her bol-banao alive.

गायन-शैली Musical Style

ठुमरी की टीस के भीतर टप्पे-सी फुर्ती; बनारस की वह आवाज़ 'जो खेलते हुए रोती है'।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Tappa-quick ornament inside thumri's ache; the Banaras 'voice that weeps while it plays'.

सांस्कृतिक प्रभाव Cultural Impact

सिद्धेश्वरी देवी के साथ उन्होंने तवायफ़-परंपरा की कला को गरिमा समेत मंच-और-रेडियो युग तक पहुँचाया।

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With Siddheshwari Devi she carried the tawaif tradition's art into the concert-and-radio age with dignity intact.

तालीम, विधाएँ और भाषाएँ

Training · Genres · Languages

तालीम · Training

बनारस पूरब-अंग परंपरा

ठुमरी, दादरा, टप्पा

विधाएँ · Genres

ठुमरी दादरा होली Seasonal

भाषाएँ · Languages Sung

braj

जीवन-रेखा

Career Highlights
  1. 1936 तवे पर 'फूल गेंदवा न मारो' — उनका हस्ताक्षर 'Phool Gendwa Na Maro' on disc — her signature
  2. 1969 संगीत नाटक अकादमी सम्मान Sangeet Natak Akademi Award

पुरस्कार एवं सम्मान

Awards & Recognition
  1. 1969 संगीत नाटक अकादमी सम्मान Sangeet Natak Akademi Award

अन्य विवरण

More Details
Death Year
1974

Legacy

उनके तवे आज भी पूरब-अंग की कसौटी हैं; गिरिजा देवी और बनारस-परंपरा ने उनका बोल-बनाव जीवित रखा।

Her records remain the reference purab-ang; Girija Devi and the Banaras line kept her bol-banao alive.

Musical Style

ठुमरी की टीस के भीतर टप्पे-सी फुर्ती; बनारस की वह आवाज़ 'जो खेलते हुए रोती है'।

Tappa-quick ornament inside thumri's ache; the Banaras 'voice that weeps while it plays'.

अभिलेख-सार

Discography Summary
हिंदीगीत संग्रह से · From the HindiGeet Archive
संग्रह में गीत3 — नीचे जुड़े हुए पन्नों में सूचीबद्ध
कुल ज्ञात रिकॉर्डिंग3 — 3 संग्रह में उपलब्ध
रिकॉर्डिंग-काल1936–1945 · पहला सत्र 1936
फ़िल्में व डिस्कHis Master'S Voice (C.1936) · His Master'S Voice (C.1940) · His Master'S Voice (C.1945)
रिकॉर्ड लेबलHMV
प्रमुख भूमिकागायक
नित्य सहयोगीTraditional (Holi/Braj Folk Classical Text) · Wajid Ali Shah (Attributed) · Traditional (Monsoon/Braj Seasonal Text)
हस्ताक्षर-गीतPhool Gendwa Na Maro (Pilu Thumri) · Babul Mora Naihar Chhuto Jaye (Thumri)
स्रोतderived from the HindiGeet song archive

जुड़े हुए पन्ने

Connected Plates · The Graph Made Visible

अटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — रसूलन बाई से उनके गीत, फ़िल्में, घराना, समकालीन और युग, सब यहाँ से खुलते हैं।

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