गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
किताब मुझको बनाता तो तेरा क्या जाता
Kitab Mujhko Banata Toh Tera Kya Jata
ईश्वरलाल का उलाहना-भरा एकल — फ़िल्म-ग़ज़ल की थकी-हारी स्पष्टवादिता के साथ नियति को संबोधित।
भावउदास · दार्शनिक
भाषाhindi-urdu गतिधीमी स्वरूपएकल पुरुष
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
ईश्वरलाल का उलाहना-भरा एकल — फ़िल्म-ग़ज़ल की थकी-हारी स्पष्टवादिता के साथ नियति को संबोधित।
In EnglishAn Ishwarlal solo of reproach — addressing fate with the weary candour of a film ghazal.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
फ़रियाद (1942), रणजीत मूवीटोन का एक ईश्वरलाल एकल, जिसे खेमचंद प्रकाश ने डी.एन. माधोक के शब्दों पर रचा। शीर्षक — एक विलापमय 'मुझे ... बना देता तो तेरा क्या बिगड़ता' — वही उलाहना-भरा, नियति को संबोधित करता स्वर पकड़ता है जो फ़िल्म (जिसका नाम ही 'गुहार' है) को उसकी भावनात्मक धुरी देता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
An Ishwarlal solo from Fariyaad (1942), Ranjit Movietone, composed by Khemchand Prakash to D.N. Madhok's words. The title — a plaintive 'what would it have cost you to have made me...' — strikes the reproachful, fate-addressing note that gives the film (whose name itself means 'the plea') its emotional through-line.
संगीत The Music
खेमचंद प्रकाश पंक्तियों को एक धीमे फ़िल्म-ग़ज़ल ढाँचे में रखते हैं, जहाँ धुन माधोक की अलंकारिक पंक्तियों की स्वाभाविक लय का अनुसरण करती है। उस युग के गायक-अभिनेता ईश्वरलाल इसे उसी अविचल, बोलचाल के निकट उच्चारण से प्रस्तुत करते हैं जिसकी यह विधा माँग करती है, और उनके पीछे वाद्य-संयोजन न्यूनतम रखा गया है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Khemchand Prakash sets the verse in a slow film-ghazal frame, the melody following the natural cadence of Madhok's rhetorical lines. Ishwarlal, a singing actor of the era, delivers it with the unhurried, speech-near phrasing the form demands, the orchestration kept minimal behind him.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Slow
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | किताब मुझको बनाता तो तेरा क्या जाता · Kitab Mujhko Banata Toh Tera Kya Jata |
|---|---|
| फ़िल्म | फ़रियाद · 1942 |
| वर्ष · युग | 1942 |
| गायक | Ishwarlal |
| गीतकार | D. N. Madhok |
| संगीतकार | Khemchand Prakash |
| स्वरूप | एकल पुरुष |
| गति | धीमी |
| भाषा | hindi-urdu |
| भाव | उदास · दार्शनिक |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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