गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
क्यों मन को रोग लगाता है
Kyun Man Ko Rog Lagaata Hai
हृदय के जाल पर एक चेतावनी भरा एकल — 'क्यों मन को रोग लगाता है, नैनों से उलझ कर क्या पाया'।
भावउदास · दार्शनिक
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
हृदय के जाल पर एक चेतावनी भरा एकल — 'क्यों मन को रोग लगाता है, नैनों से उलझ कर क्या पाया'।
In EnglishA cautionary solo on the snares of the heart — 'why do you afflict the mind with sickness?'
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'क्यों मन को रोग लगाता है' नेशनल स्टूडियोज़ की 1941 की फ़िल्म नई रोशनी का एक सरदार अख़्तर एकल है, जिसे अनिल बिस्वास ने डॉ. सफ़दर 'आह' के बोलों पर रचा। बोल नैनों और हृदय की उलझनों के विरुद्ध चेतावनी देते हैं — एक चिंतनशील स्वर जो फ़िल्म के सुधारवादी 'नई रोशनी' शीर्षक से मेल खाता है; गीत और सरदार अख़्तर की गायकी अनिल बिस्वास की पूर्ण डिस्कोग्राफ़ी में प्रलेखित है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
'Kyun Man Ko Rog Lagaata Hai' is a Sardar Akhtar solo from National Studios' 1941 film Nai Roshni, composed by Anil Biswas to lyrics by Dr. Safdar 'Aah'. The lyric warns against the entanglements of the eyes and the heart, a reflective register fitting the film's reformist 'New Light' title; the song and Sardar Akhtar's credit are documented in the Anil Biswas complete filmography.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | क्यों मन को रोग लगाता है · Kyun Man Ko Rog Lagaata Hai |
|---|---|
| फ़िल्म | नई रोशनी · 1941 |
| वर्ष · युग | 1941 |
| गायक | Sardar Akhtar |
| गीतकार | Safdar Aah |
| संगीतकार | Anil Biswas |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | उदास · दार्शनिक |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
जुड़े हुए पन्ने
Connected Plates · The Graph Made Visibleअटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — इस गीत से जुड़े गीत, कलाकार, फ़िल्म, राग-ताल-विधा, सब यहाँ से खुलते हैं।
मिलते-जुलते गीत · Related Songs
कलाकार · The Artists
फ़िल्म · The Film
साझा कीजिए · Share this Plate


