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दिल लगाने में कुछ मज़ा ही नहीं — शहंशाह बाबर (1944) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

दिल लगाने में कुछ मज़ा ही नहीं

Dil Lagane Mein Kuch Maza Hi Nahi

ख़ुर्शीद एक थके हुए दिल को खेमचंद प्रकाश की संयमित धुन के सामने रखती हैं — मोहभंग जो प्रेमगीत का रूप धरे है।

भावमीठा-कड़वा · उदास · रोमांटिक

भाषाhindi-urdu   गतिधीमी   स्वरूपएकल महिला

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

ख़ुर्शीद एक थके हुए दिल को खेमचंद प्रकाश की संयमित धुन के सामने रखती हैं — मोहभंग जो प्रेमगीत का रूप धरे है।

In EnglishKhurshid sets a weary heart against Khemchand Prakash's restrained melody — disenchantment dressed as a love song.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

रणजीत मूवीटोन की 1944 की ऐतिहासिक फ़िल्म शहंशाह बाबर का ख़ुर्शीद का एकल गीत, संगीत खेमचंद प्रकाश का और बोल शम्स लखनवी के। शीर्षक — 'दिल लगाने में कुछ मज़ा ही नहीं' — इस गीत को उस ग़ज़ल-रंगत वाले मुहावरे में रखता है जिसे उर्दू गीतकार उस दौर की नायिकाओं के लिए पसंद करते थे। यह फ़िल्म के प्रमुख ख़ुर्शीद एकल में से एक है और आज मुख्यतः अभिलेखीय 78-आरपीएम पुनर्प्रकाशनों के माध्यम से सुना जाता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

A Khurshid solo from Ranjit Movietone's 1944 historical Shahenshah Babar, with music by Khemchand Prakash and words by Shams Lakhnavi. The title — 'there is no pleasure left in giving one's heart away' — places the number in the ghazal-tinged register that Urdu lyric writers favoured for the period's heroines. It is one of the film's principal Khurshid solos and circulates today chiefly through archival 78-rpm reissues.

संगीत The Music

महल से पहले रणजीत के अपने विपुल वर्षों में खेमचंद प्रकाश धुन को ख़ुर्शीद के स्पष्ट ऊँचे स्वर के इर्द-गिर्द गढ़ते हैं, वाद्य-संयोजन को हल्का रखते हुए ताकि आवाज़ और उर्दू लय उदासी को सँभाले। धीमी लय और ग़ज़ल की ओर झुकी पदावली 1940 के दशक के मध्य की वेशभूषा-नाटक की नायिका के विलाप की विशेषता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Khemchand Prakash, in his prolific Ranjit years before Mahal, shapes the tune around Khurshid's clear upper register, keeping the orchestration light so the voice and the Urdu cadence carry the melancholy. The slow tempo and ghazal-leaning phrasing are typical of the costume-drama heroine's lament in mid-1940s Hindi cinema.

वर्गीकरण

Classification

Genre

FilmiGhazal
Tempo
Slow

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकदिल लगाने में कुछ मज़ा ही नहीं · Dil Lagane Mein Kuch Maza Hi Nahi
फ़िल्मशहंशाह बाबर · 1944
वर्ष · युग1944
गायकKhursheed
गीतकारShams Lakhnavi
संगीतकारKhemchand Prakash
स्वरूपएकल महिला
गतिधीमी
भाषाhindi-urdu
भावमीठा-कड़वा · उदास · रोमांटिक
लोकप्रियताObscure
बोल-स्थितिकेवल झलक

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