सिनेमा विंग · फ़िल्म-पट्टिका · Film Plate
क़ातिल
Qatil
शैलीAction · Musical
भाषाhindi प्रकारकथा-चित्र (फ़ीचर)
गीत10 — नीचे पूरी संगीत-सूची
कथा-सार
Synopsisक़ातिल 1944 की एक हिंदी एक्शन फ़िल्म है, जिसका निर्देशन के. एल. ख़ान ने किया और जिसमें ई. बिलिमोरिया तथा शांता रानी मुख्य भूमिकाओं में थे। युद्धकाल के अधिकांश एक्शन व अपराध सिनेमा की तरह इसमें भी मेलोड्रामा और रहस्य के साथ पूरा गीत-संगीत था — जिसे के. नारायण राव ने युवा शेवन रिज़वी की रचनाओं पर संगीतबद्ध किया।
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Qatil ('The Killer') is a 1944 Hindi action picture directed by K. L. Khan, with E. Billimoria and Shanta Rani in the leading roles. Like much of the action and crime cinema of the wartime years, it paired melodrama and intrigue with a full song score — here composed by K. Narayana Rao to verses by the young Shewan Rizvi.
संगीत-सूची
The Soundtrackके. नारायण राव द्वारा शेवन रिज़वी के बोलों पर रचा गया यह संगीत दस गीतों का है। गायन ख़ान मस्ताना, सुधा कर्मासे और यशवंत भट्ट के बीच बँटा है — 1947 के बाद कुछ चुनिंदा स्वरों के इर्द-गिर्द सिमटने से पहले युद्धकाल का एक विशिष्ट नर-नारी पार्श्वगायन।
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The score, composed by K. Narayana Rao to Shewan Rizvi's lyrics, runs to ten songs. The vocal work is shared among Khan Mastana, Sudha Karmase and Yashwant Bhatt — a typical wartime spread of male and female playback before the post-1947 consolidation around a handful of star voices.
- देख लिया ओ भगवान Dekh Liya O Bhagwan स्वर: Khan Mastana
- दुनिया वाले सच कहना Duniya Wale Sach Kehna स्वर: Khan Mastana
- हमने तो मोहब्बत में Humne To Mohabbat Me
- जितना भी तू मिटा सके मेरे सुकू Jitna Bhi Tu Mita Sake Mere Suku स्वर: सुधा कर्मासे
- जितनी पी सके तू पी Jitni Pee Sake Tu Pee
- ले लो फूल Le Lo Phool स्वर: सुधा कर्मासे
- लो प्रेम का नाता टूट गया Lo Prem Ka Nata Tut Gaya स्वर: यशवंत भट्ट
- मैं कोयल बन जाऊँ Mai Koyal Ban Jaau स्वर: सुधा कर्मासे
- ओ रोने वाले ये दुनिया है O Rone Wale Ye Duniya Hai स्वर: यशवंत भट्ट
- उल्फ़त का ज़माना है Ulfat Ka Zamana Hai स्वर: सुधा कर्मासे
पट्टिका-लेख
The Monographमहत्व Significance
क़ातिल 1940 के दशक के मध्य की उन अनेक 'प्रोग्राम फ़िल्मों' में से एक है जिनका मुख्य बचा हुआ दस्तावेज़ उनकी गीत-सूची है। यह उन फ़िल्मों में से एक है जिसने भीड़भाड़ वाले 1944 के मौसम में संगीतकार के. नारायण राव को परदे का श्रेय दिलाया, और जिसके सभी गीत शेवन रिज़वी की क़लम से थे।
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Qatil belongs to the large body of mid-1940s programme films whose chief surviving record is their soundtrack catalogue. It is one of the films that gave composer K. Narayana Rao a screen credit during the crowded 1944 season, set entirely to the lyrics of Shewan Rizvi.
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | क़ातिल · Qatil |
|---|---|
| वर्ष · युग | 1944 — Golden Prewar |
| निर्देशक | के. एल. ख़ान · K. L. Khan |
| संगीत-निर्देशक | के. नारायण राव · K. Narayana Rao |
| कलाकार-मंडली | ई. बिलिमोरिया · E. Billimoria · शांता रानी · Shanta Rani · बाबूराव · Baburao · दिलावर · Dilawar · आशा रानी · Asha Rani · बद्री प्रसाद · Badri Prasad |
| शैली | Action · Musical |
| भाषा | hindi |
| प्रकार | कथा-चित्र (फ़ीचर) |
| गीत | 10 गीत — ऊपर पूरी संगीत-सूची |
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