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हैं बहाने नित नई तकरार के
हैं बहाने नित नई तकरार के — आदाब अर्ज़ (1943)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

हैं बहाने नित नई तकरार के

Hai Bahane Nit Nayi Takrar Ke

'हैं बहाने नित नई तकरार के' — नायक करण दीवान आदाब अर्ज़ में अपना पार्श्व-गायन ख़ुद निभाते हैं।

भावचुलबुला · रोमांटिक

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपएकल पुरुष

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

'हैं बहाने नित नई तकरार के' — नायक करण दीवान आदाब अर्ज़ में अपना पार्श्व-गायन ख़ुद निभाते हैं।

In English'They are just pretexts for ever-new quarrels' — leading man Karan Dewan sings his own playback in Aadab Arz.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

'हैं बहाने नित नई तकरार के' अतुल्स सॉन्ग ए डे द्वारा अनुक्रमित आदाब अर्ज़ के तीन गीतों में से एक है। इसे फ़िल्म के नायक करण दीवान ने अपनी ही आवाज़ में गाया — समर्पित पार्श्व-गायन व्यवस्था के स्थापित होने से पहले की सामान्य प्रथा। प्रेमी-कलह का विषय (हर बहाना एक नई तकरार का बहाना है) 1940 के दशक के सामाजिक फ़िल्मों की हल्की रोमानी कॉमेडी से मेल खाता है। बोल पंडित इंद्र, संगीत ज्ञान दत्त।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

'Hai Bahane Nit Nayi Takrar Ke' is one of three Aadab Arz numbers indexed by Atul's Song A Day. Sung by the film's hero Karan Dewan in his own voice — standard practice before the dedicated playback system took hold — the lover's-quarrel theme (every excuse is a pretext for a fresh tiff) fits the light romantic comedy of 1940s social films. Lyric by Pandit Indra, music by Gyan Dutt.

संगीत The Music

ज्ञान दत्त करण दीवान को एक उछाल भरी, मध्यम-गति की धुन देते हैं, जिसमें बातचीत-सी लय है — वही गुनगुनाने योग्य नायक-एकल पंक्ति जिसे 1940 के दशक के संगीतकार किसी अभिनेता की अप्रशिक्षित पर रंगीली आवाज़ के अनुरूप ढालते थे।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Gyan Dutt gives Karan Dewan a buoyant, mid-tempo melody with a conversational lilt, the kind of singable hero's-solo line that 1940s composers tailored to an actor's untrained but characterful voice.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकहैं बहाने नित नई तकरार के · Hai Bahane Nit Nayi Takrar Ke
फ़िल्मआदाब अर्ज़ · 1943
वर्ष · युग1943
गायकKaran Dewan
गीतकारPandit Indra
संगीतकारGyan Dutt
स्वरूपएकल पुरुष
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावचुलबुला · रोमांटिक
बोल-स्थितिकेवल झलक

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