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क्यों मन को रोग लगाता है — नई रोशनी (1941) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

क्यों मन को रोग लगाता है

Kyun Man Ko Rog Lagaata Hai

हृदय के जाल पर एक चेतावनी भरा एकल — 'क्यों मन को रोग लगाता है, नैनों से उलझ कर क्या पाया'।

भावउदास · दार्शनिक

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपएकल महिला

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

हृदय के जाल पर एक चेतावनी भरा एकल — 'क्यों मन को रोग लगाता है, नैनों से उलझ कर क्या पाया'।

In EnglishA cautionary solo on the snares of the heart — 'why do you afflict the mind with sickness?'

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

'क्यों मन को रोग लगाता है' नेशनल स्टूडियोज़ की 1941 की फ़िल्म नई रोशनी का एक सरदार अख़्तर एकल है, जिसे अनिल बिस्वास ने डॉ. सफ़दर 'आह' के बोलों पर रचा। बोल नैनों और हृदय की उलझनों के विरुद्ध चेतावनी देते हैं — एक चिंतनशील स्वर जो फ़िल्म के सुधारवादी 'नई रोशनी' शीर्षक से मेल खाता है; गीत और सरदार अख़्तर की गायकी अनिल बिस्वास की पूर्ण डिस्कोग्राफ़ी में प्रलेखित है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

'Kyun Man Ko Rog Lagaata Hai' is a Sardar Akhtar solo from National Studios' 1941 film Nai Roshni, composed by Anil Biswas to lyrics by Dr. Safdar 'Aah'. The lyric warns against the entanglements of the eyes and the heart, a reflective register fitting the film's reformist 'New Light' title; the song and Sardar Akhtar's credit are documented in the Anil Biswas complete filmography.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकक्यों मन को रोग लगाता है · Kyun Man Ko Rog Lagaata Hai
फ़िल्मनई रोशनी · 1941
वर्ष · युग1941
गायकSardar Akhtar
गीतकारSafdar Aah
संगीतकारAnil Biswas
स्वरूपएकल महिला
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावउदास · दार्शनिक
बोल-स्थितिकेवल झलक

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