गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
सैयाँ रे सैयाँ
Saiyya Re Saiyya
सैयाँ रे सैयाँ — ज़बान से वत्सला कुमठेकर का प्रणय-संबोधन।
भावचुलबुला · रोमांटिक
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
सैयाँ रे सैयाँ — ज़बान से वत्सला कुमठेकर का प्रणय-संबोधन।
In EnglishBeloved, o my beloved — Vatsala Kumthekar's romantic address from Zaban.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
ज़बान (1943) का वत्सला कुमठेकर का एक एकल गीत, जिसे डी.एन. माधोक ने लिखा। 'सैयाँ' का संबोधन इसे फ़िल्म के प्रणय-गीतों में से एक के रूप में चिह्नित करता है, और इसे सी. रामचंद्र ने अपने 1940 के दशक के आरंभिक दौर में संगीतबद्ध किया।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
A solo by Vatsala Kumthekar from Zaban (1943) written by D.N. Madhok. The 'saiyya' (beloved) address marks it as one of the film's romantic numbers, composed by C. Ramchandra in his early-1940s phase.
संगीत The Music
सी. रामचंद्र वत्सला कुमठेकर की आवाज़ को एक कोमलता से झूमती मध्यम लय में ढालते हैं; 'सैयाँ' की दोहराई जाती टेक एक झूलती, धुन-प्रधान शैली को आमंत्रित करती है जो उस दौर की हल्की संगत के अनुरूप है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
C. Ramchandra sets Vatsala Kumthekar's voice to a gently swinging medium tempo; the repeated 'saiyya' refrain invites a lilting, melody-forward treatment in keeping with the light orchestration of the period.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | सैयाँ रे सैयाँ · Saiyya Re Saiyya |
|---|---|
| फ़िल्म | ज़बान · 1943 |
| वर्ष · युग | 1943 |
| गायक | Vatsala Kumthekar |
| गीतकार | D. N. Madhok |
| संगीतकार | C. Ramchandra |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | चुलबुला · रोमांटिक |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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