गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
फिर आई है दिवाली
Phir Aayi Hai Diwali
फ़िरोज़ निज़ामी बड़ी बात की शुरुआत दिवाली के दीयों से करते हैं — कुसुम मंत्री की आवाज़ त्योहार को संगीत-पट्टी में ले आती है।
भावउत्सव · भक्ति · Festive
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
फ़िरोज़ निज़ामी बड़ी बात की शुरुआत दिवाली के दीयों से करते हैं — कुसुम मंत्री की आवाज़ त्योहार को संगीत-पट्टी में ले आती है।
In EnglishFeroze Nizami opens Badi Baat with the lamps of Diwali, Kusum Mantri's voice carrying the festival into the soundtrack.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'फिर आई है दिवाली' 1944 की फ़िल्म बड़ी बात का एक त्योहार-गीत है, जिसे कुसुम मंत्री ने फ़िरोज़ निज़ामी की धुन और स्वामी रामानंद सरस्वती के बोलों पर गाया। दिवाली का लौटना 1940 के दशक के हिंदी सिनेमा में बार-बार आने वाला उपकरण था — एक उत्सवपूर्ण समूह-गीत के लिए तैयार अवसर — और निज़ामी इसे यहाँ एक उज्ज्वल, भक्तिमय रचना के रूप में ढालते हैं। दशक की कम-प्रलेखित आवाज़ों में से एक कुसुम मंत्री इसका नेतृत्व करती हैं।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
'Phir Aayi Hai Diwali' is a festival song from the 1944 film Badi Baat, sung by Kusum Mantri to a Feroze Nizami composition and words by Swami Ramanand Saraswati. The return of Diwali is a recurring device in 1940s Hindi cinema — a ready-made occasion for a celebratory ensemble number — and Nizami frames it here as a bright, devotional set-piece. Kusum Mantri, one of the lesser-documented voices of the decade, carries the lead.
संगीत The Music
फ़िरोज़ निज़ामी हारमोनियम और तबले पर टिकी एक मध्यम-लय की भक्ति-धुन से त्योहार का माहौल बाँधते हैं — 1940 के दशक के दिवाली-गीतों के उस उत्सवी मुहावरे में। पाकिस्तानी सिनेमा में बाद की पारी से पहले लाहौर परंपरा में प्रशिक्षित निज़ामी संयोजन को सीधा और गीत-केंद्रित रखते हैं, और दीयों की रौनक को परिभाषित करने का काम कुसुम मंत्री की आवाज़ पर छोड़ देते हैं।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Feroze Nizami sets the festival mood with a medium-tempo devotional melody anchored by harmonium and tabla, in the celebratory idiom common to Diwali numbers of the 1940s. Trained in the Lahore tradition before his later move to Pakistani cinema, Nizami keeps the arrangement direct and song-forward, letting Kusum Mantri's voice define the lamp-lit cheer.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | फिर आई है दिवाली · Phir Aayi Hai Diwali |
|---|---|
| फ़िल्म | बड़ी बात · 1944 |
| वर्ष · युग | 1944 |
| गायक | Kusum Mantri |
| गीतकार | Swami Ramanand Saraswati |
| संगीतकार | Feroze Nizami |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | उत्सव · भक्ति · Festive |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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