गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
न भूलेंगे तुझको
Na Bhulenge Tujhko
'न भूलेंगे तुझको' — खेमचंद प्रकाश की संगीत-पट्टी से याद किए प्रेम का एक ख़ुर्शीद एकल, जिसकी पूरी आरंभिक पंक्ति है 'न भूलेंगे तुझको भुला देनेवाले'।
भावउदास · पुरानी यादें · रोमांटिक
भाषाhindi-urdu गतिधीमी स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
'न भूलेंगे तुझको' — खेमचंद प्रकाश की संगीत-पट्टी से याद किए प्रेम का एक ख़ुर्शीद एकल, जिसकी पूरी आरंभिक पंक्ति है 'न भूलेंगे तुझको भुला देनेवाले'।
In English'We shall never forget you' — a Khurshid solo of remembered love from Khemchand Prakash's score, its full opening line 'na bhulenge tujhko bhula denewale'.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
शहंशाह बाबर (1944) की संगीत-पट्टी को सँभालने वाले ख़ुर्शीद एकलों में से एक, खेमचंद प्रकाश के संगीत पर। फ़िल्म-गीत सूचियों में अपने पूर्ण शीर्षक 'न भूलेंगे तुझको भुला देनेवाले' के अंतर्गत दस्तावेज़ित, यह उस दौर के रूमानी-विलाप मुहावरे में एक स्मृति-प्रतिज्ञा का गीत है। रिकॉर्डिंग दुर्लभ है — कम-से-कम एक संग्राहक-टिप्पणी इसे ऑनलाइन आसानी से न मिलने वाला बताती है — और यह मुख्यतः ख़ुर्शीद तथा संगीतकार की डिस्कोग्राफ़ी में एक प्रविष्टि के रूप में जीवित है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
One of the Khurshid solos that anchor the soundtrack of Shahenshah Babar (1944), set to Khemchand Prakash's music. Documented across film-song listings under its fuller title 'Na Bhulenge Tujhko Bhula Denewale', it is a vow-of-remembrance lyric in the era's romantic-lament idiom. The recording is scarce — at least one collector's note records it as not readily traceable online — and it survives mainly as a discographical entry for Khurshid and the composer.
संगीत The Music
खेमचंद प्रकाश गीत को एक धीमी, ठहरती लय पर साधते हैं जो ख़ुर्शीद के करुण ऊँचे स्वर के इर्द-गिर्द बुनी है, उर्दू-रंगत पदावली स्मृति-प्रतिज्ञा की टेक को सहारा देती है। यह रचना 1940 के दशक के मध्य के उनके विपुल रणजीत मूवीटोन वर्षों की है, महल (1949) के उनके मील-का-पत्थर कार्य की ओर ले जाने वाले काल की।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Khemchand Prakash sets the number at a slow, dwelling tempo built around Khurshid's plaintive upper register, the Urdu-inflected cadence supporting a refrain of vowed remembrance. The composition belongs to his prolific Ranjit Movietone years of the mid-1940s, the period leading up to his landmark work on Mahal (1949).
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Slow
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | न भूलेंगे तुझको · Na Bhulenge Tujhko |
|---|---|
| फ़िल्म | शहंशाह बाबर · 1944 |
| वर्ष · युग | 1944 |
| गायक | Khursheed |
| संगीतकार | Khemchand Prakash |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | धीमी |
| भाषा | hindi-urdu |
| भाव | उदास · पुरानी यादें · रोमांटिक |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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