गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
क्यूँ ललचाया उस दुनिया पर
Kyun Lalchaya Us Duniya Par
क्यूँ ललचाया उस दुनिया पर? — अशरफ़ ख़ान पिछले भाग के प्रश्न का उत्तर देते हैं।
भावतीव्र · दार्शनिक
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल पुरुष
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
क्यूँ ललचाया उस दुनिया पर? — अशरफ़ ख़ान पिछले भाग के प्रश्न का उत्तर देते हैं।
In EnglishWhy covet that world? — Ashraf Khan answers the question the previous part posed.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
पगली दुनिया के एक युग्म दार्शनिक क्रम का दूसरा हिस्सा — अशरफ़ ख़ान का यह एकल 'दुनिया बनाकर किसलिए' की तत्त्व-शिकायत का उत्तर देता है। पंडित इंद्र के बोल प्रश्न को उपदेश में बदल देते हैं — आख़िर इस दुनिया पर ललचाना ही क्यूँ — और बुलो सी. रानी पुरुष स्वर को पहले हिस्से की अनिर्णीत खुलावट से अधिक दृढ़, अधिक निश्चयात्मक आधार देते हैं।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
The second part of a paired philosophical sequence in Pagli Duniya, this Ashraf Khan solo answers the metaphysical complaint of 'Duniya Banakar Kisliye'. Pandit Indra's lyric turns the questioning into admonition — why be lured by the world at all — and Bulo C. Rani gives the male voice a firmer, more decisive footing than the open-ended first half.
संगीत The Music
बुलो सी. रानी उत्तर देने वाले हिस्से को अधिक निश्चय के साथ रचते हैं — एक स्थिर लय और एक दृढ़ धुन-अवरोह, और तबला-हारमोनियम पर अशरफ़ ख़ान की मापी हुई पुरुष प्रस्तुति के साथ चलती सारंगी। दो-भाग वाले क्रम के भीतर उत्तर के रूप में रचा गया, यह संगीत अपने साथी टुकड़े के अनसुलझे प्रश्न को सुलझाता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Bulo C. Rani sets the answering half with greater resolve — a steadier tempo and a firmer melodic descent, sarangi shadowing Ashraf Khan's measured male delivery over tabla and harmonium. Framed as the response within the two-part sequence, the music resolves the unsettled question of its companion piece.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | क्यूँ ललचाया उस दुनिया पर · Kyun Lalchaya Us Duniya Par |
|---|---|
| फ़िल्म | पगली दुनिया · 1944 |
| वर्ष · युग | 1944 |
| गायक | Ashraf Khan |
| गीतकार | Pandit Indra |
| संगीतकार | Bulo C. Rani |
| स्वरूप | एकल पुरुष |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | तीव्र · दार्शनिक |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
जुड़े हुए पन्ने
Connected Plates · The Graph Made Visibleअटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — इस गीत से जुड़े गीत, कलाकार, फ़िल्म, राग-ताल-विधा, सब यहाँ से खुलते हैं।
मिलते-जुलते गीत · Related Songs
कलाकार · The Artists
फ़िल्म · The Film
साझा कीजिए · Share this Plate
