गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
कश्ती-ए-शौक़ को मौजों का सहारा न मिला
Kashti-e-Shauq Ko Maujon Ka Sahara Na Mila
शौक़ की नाव को लहरों का सहारा न मिला — जगमोहन सुरसागर के मख़मली स्वर में बही एक हार-स्वीकार की ग़ज़ल।
भावउदास · दार्शनिक
भाषाurdu-hindi गतिधीमी स्वरूपएकल पुरुष
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
शौक़ की नाव को लहरों का सहारा न मिला — जगमोहन सुरसागर के मख़मली स्वर में बही एक हार-स्वीकार की ग़ज़ल।
In EnglishThe boat of longing found no support from the waves — a ghazal of resignation carried by Jagmohan Sursagar's velvet baritone.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
आरज़ू (1942) का सबसे याद किया जाने वाला गीत, यह उर्दू ग़ज़ल जगमोहन सुरसागर — जगन्मय मित्र का मंच-नाम — द्वारा गाई गई है, जो आरंभिक कलकत्ता टॉकी युग की सबसे विशिष्ट आवाज़ों में से एक थे। ख़्वाजा किदवई के कलाम पर सुबल दासगुप्ता द्वारा रचित, यह मुख्यतः एक 78-आरपीएम रिकॉर्डिंग के रूप में बचा है जिसे जगमोहन के कार्य के संग्रहकर्ता बहुमूल्य मानते हैं। लहरों का सहारा न पाने वाली प्रेम-नौका का रूपक उस दौर की फ़िल्मी ग़ज़ल के हार-स्वीकार करते, चिंतनशील स्वर का प्रतिनिधित्व करता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
The best-remembered song of Arzoo (1942), this Urdu ghazal is sung by Jagmohan Sursagar — the stage name of Jaganmoy Mitra — one of the most distinctive voices of the early Calcutta talkie era. Composed by Subal Dasgupta to Khwaja Kidwai's verse, it survives chiefly as a 78-rpm recording prized by collectors of Jagmohan's work. The metaphor of a love-boat denied the support of the waves typifies the resigned, contemplative register of the period's film ghazal.
संगीत The Music
सुबल दासगुप्ता इस ग़ज़ल को 1940 के दशक के आरंभ की संयमित कलकत्ता लघु-शास्त्रीय शैली में ढालते हैं — एक धीमी, मींड-भरी स्वर-पंक्ति के पीछे विरल वाद्य-संयोजन, जो जगमोहन सुरसागर के मुलायम स्वर को अभिव्यक्ति का कार्य करने देता है। संयोजन ताल से अधिक ठहराव और रुबातो को महत्व देता है, जो उस समय लाहौर से उभर रहे नृत्य-प्रधान संगीत के बजाय चिंतनशील ग़ज़ल-रूप के अनुरूप है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Subal Dasgupta sets the ghazal in the restrained Calcutta light-classical idiom of the early 1940s — sparse instrumentation behind a slow, melismatic vocal line that lets Jagmohan Sursagar's smooth baritone do the expressive work. The arrangement favours space and rubato over rhythm, in keeping with the contemplative ghazal form rather than the dance-driven scores then emerging from Lahore.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Slow
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | कश्ती-ए-शौक़ को मौजों का सहारा न मिला · Kashti-e-Shauq Ko Maujon Ka Sahara Na Mila |
|---|---|
| फ़िल्म | आरज़ू · 1942 |
| वर्ष · युग | 1942 |
| गायक | Jagmohan Sursagar |
| गीतकार | ख़्वाजा किदवई |
| संगीतकार | Subal Dasgupta |
| स्वरूप | एकल पुरुष |
| गति | धीमी |
| भाषा | urdu-hindi |
| भाव | उदास · दार्शनिक |
| लोकप्रियता | Known |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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