गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
साक़ी साक़ी दिल बुझ ही गया है सीने में
Saaqi Saaqi Dil Bujh Hi Gaya Hai Seene Mein
ज़ोहराबाई अंबालेवाली साक़ी को पुकारती हैं, जब दिल बुझे दीये की तरह सीने में बुझ जाता है — नौशाद के हाथों एक महफ़िल का विलाप।
भावतीव्र · उदास
भाषाhindi-urdu गतिधीमी स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
ज़ोहराबाई अंबालेवाली साक़ी को पुकारती हैं, जब दिल बुझे दीये की तरह सीने में बुझ जाता है — नौशाद के हाथों एक महफ़िल का विलाप।
In EnglishZohrabai Ambalewali calls to the saqi as the heart goes out like a snuffed flame — a mehfil lament in Naushad's hands.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
ज़ोहराबाई अंबालेवाली — 1940 के दशक की महान आवाज़ों में से एक — द्वारा गाया गया 'गीत' (1944) का यह गीत उर्दू शायरी के साक़ी-और-महफ़िल मुहावरे में काम करता है, जहाँ साक़ी को संबोधित करना दुख का वाहक बनता है। यह नौशाद के आरंभिक संग्रह में डी. एन. माधोक के बोलों के लिए उनके अन्य कारदार-कालीन काम के साथ बैठता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Sung by Zohrabai Ambalewali — one of the great voices of the 1940s — this number from 'Geet' (1944) works in the saqi-and-mehfil register of Urdu poetry, the addressing of the cup-bearer as a vehicle for sorrow. It sits in Naushad's early catalogue alongside his other Kardar-era work for D. N. Madhok's lyrics.
संगीत The Music
नौशाद इस विलाप को धीमी, गंभीर लय और विरल संगत में रचते हैं, जिससे ज़ोहराबाई अंबालेवाली का भरा-पूरा निचला स्वर शेर का भार उठाता है। साक़ी का बिंब थोड़ी शास्त्रीय, ग़ज़ल की ओर झुकी मधुर बनावट को आमंत्रित करता है, जिसे नौशाद ने अपने करियर के इस आरंभिक चरण में भी सहजता से संभाला।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Naushad sets the lament at a slow, brooding tempo with sparse accompaniment, letting Zohrabai Ambalewali's full-throated lower register carry the weight of the verse. The saqi motif invites the slightly classical, ghazal-leaning melodic shape that Naushad handled with ease even this early in his career.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Slow
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | साक़ी साक़ी दिल बुझ ही गया है सीने में · Saaqi Saaqi Dil Bujh Hi Gaya Hai Seene Mein |
|---|---|
| फ़िल्म | गीत · 1944 |
| वर्ष · युग | 1944 |
| गायक | Zohrabai Ambalewali |
| गीतकार | D. N. Madhok |
| संगीतकार | Naushad |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | धीमी |
| भाषा | hindi-urdu |
| भाव | तीव्र · उदास |
| लोकप्रियता | Known |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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