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रात पड़े मत रूठ दीवानी — बम्बई की सैर (1941) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

रात पड़े मत रूठ दीवानी

Raat Pade Mat Rooth Deewani

कांतिलाल की रात की मनुहार — 'रात पड़े, मत रूठ दीवानी' — खेमचंद प्रकाश की धुन पर।

भावपुरानी यादें · रोमांटिक

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपएकल पुरुष

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

कांतिलाल की रात की मनुहार — 'रात पड़े, मत रूठ दीवानी' — खेमचंद प्रकाश की धुन पर।

In EnglishKantilal's nocturnal plea — 'night falls, don't sulk, my love' — set to Khemchand Prakash's melody.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

'बम्बई की सैर' (1941) से कांतिलाल का एक पुरुष एकल, 'रात पड़े मत रूठ दीवानी' एक प्रेमी की देर-रात की मनुहार के जाने-पहचाने भाव पर चलता है। यह फ़िल्म के उन कुछ गीतों में से है जिनके लिए एक अकेले गीतकार — पंडित इंद्र — को विशेष रूप से श्रेय दिया गया है, जो शेष संगीत-पट्टी पर लागू सामूहिक चार-लेखक श्रेय से अलग है। संगीत खेमचंद प्रकाश का है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

A male solo by Kantilal from 'Bambai Ki Sair' (1941), 'Raat Pade Mat Rooth Deewani' works the familiar terrain of a lover's late-night coaxing. This is one of the few songs in the film for which a single lyricist — Pandit Indra — is specifically credited, distinct from the collective four-writer attribution that covers most of the soundtrack. The music is by Khemchand Prakash.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकरात पड़े मत रूठ दीवानी · Raat Pade Mat Rooth Deewani
फ़िल्मबम्बई की सैर · 1941
वर्ष · युग1941
गायकKantilal
गीतकारPandit Indra
संगीतकारKhemchand Prakash
स्वरूपएकल पुरुष
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावपुरानी यादें · रोमांटिक
लोकप्रियताObscure
बोल-स्थितिकेवल झलक

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