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प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था) — दो दीवाने (1936) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था)

Prem Ki Masti Aur Jagat Me (Paan Ka Dhandha Hi Achha Tha)

“प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था)” — 1936 की फ़िल्म दो दीवाने का एक गीत। संगीत: प्रांसुख नायक। बोल: रघुनाथ ब्रह्मभट्ट। गायन: मोतीलाल।

फ़िल्मदो दीवाने (1936)वर्ष1936बोलसार्वजनिक डोमेन

भावचुलबुला · रोमांटिक

भाषाhindi  

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

“प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था)” — 1936 की फ़िल्म दो दीवाने का एक गीत। संगीत: प्रांसुख नायक। बोल: रघुनाथ ब्रह्मभट्ट। गायन: मोतीलाल।

In English“Prem Ki Masti Aur Jagat Me (Paan Ka Dhandha Hi Achha Tha)” — a song from the 1936 film Do Diwane. Music: Pransukh Nayak. Lyrics: Raghunath Bramhabhatt. Sung by Motilal.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

“प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था)” 1936 की फ़िल्म दो दीवाने के ग्यारह गीतों में से एक है — चिमनलाल लुहार द्वारा निर्देशित और मोतीलाल व शोभना समर्थ अभिनीत सागर मूवीटोन की हास्य-फ़िल्म। इस हास्य-गीत को मोतीलाल ने गाया; संगीत प्रांसुख नायक का और बोल गुजराती कवि रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ('रसकवि') के हैं। 'प्रेम के पागलपन से तो पान का धंधा ही अच्छा था' की खिन्न टेक फ़िल्म के व्यंग्यात्मक, हास्य-स्वर से मेल खाती है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

“Prem Ki Masti Aur Jagat Me (Paan Ka Dhandha Hi Achha Tha)” is one of the eleven songs of Do Diwane (1936), the Sagar Movietone comedy directed by Chimanlal Luhar and starring Motilal and Shobhana Samarth. Motilal sings this comic number, with music by Pransukh Nayak and lyrics by the Gujarati poet Raghunath Bramhabhatt ('Raskavi'). Its rueful refrain — that the humble paan trade was better than the madness of love — fits the film's satirical, comic spirit.

संगीत The Music

“प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था)” का संगीत दो दीवाने (1936) के लिए प्रांसुख नायक ने रचा; स्वर मोतीलाल।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

“Prem Ki Masti Aur Jagat Me (Paan Ka Dhandha Hi Achha Tha)” was set to music by Pransukh Nayak for the 1936 film Do Diwane and is rendered by Motilal.

काव्य The Poetry

“प्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था)” के बोल रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने लिखे — वही गुजराती 'रसकवि', जिन्होंने दो दीवाने के सभी ग्यारह गीत रचे। यह काव्य प्रेम के नशे और पान-विक्रेता की सीधी-सादी आजीविका की सुरक्षा के बीच हास्यपूर्ण तुलना करता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

The words of “Prem Ki Masti Aur Jagat Me (Paan Ka Dhandha Hi Achha Tha)” were written by Raghunath Bramhabhatt, the Gujarati 'Raskavi' (poet of rasa) who wrote all eleven lyrics of Do Diwane. The lyric humorously contrasts the intoxication of love with the simple security of the paan-seller's livelihood.

वर्गीकरण

Classification

Genre

FilmiComedyRomance

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकप्रेम की मस्ती और जगत में (पान का धंधा ही अच्छा था) · Prem Ki Masti Aur Jagat Me (Paan Ka Dhandha Hi Achha Tha)
फ़िल्मदो दीवाने · 1936
वर्ष · युग1936
गायकMotilal
गीतकारRaghunath Brahmbhatt
संगीतकारPransukh Nayak
भाषाhindi
भावचुलबुला · रोमांटिक
लोकप्रियताObscure
बोल-स्थितिसार्वजनिक

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