गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
किस ऋतु में प्रीतम रूठ गए
Kis Ritu Mein Pritam Rooth Gaye
एक प्रेमिका का विलाप — वह पूछती है, किस ऋतु में उसका प्रीतम रूठ गया?
भावविरह · उदास
भाषाhindi गतिधीमी स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
एक प्रेमिका का विलाप — वह पूछती है, किस ऋतु में उसका प्रीतम रूठ गया?
In EnglishA lover's lament — in which season, she asks, did her beloved turn away?
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
हिम्मत (1941) का एक विरह-गीत, उमराज़िया बेगम के स्वर में, रचना गोबिंद राम की और बोल अज़ीज़ कश्मीरी के। शीर्षक ऋतुओं की कल्पना के माध्यम से विरह को ढालता है — विरह-काव्य की एक प्रमुख युक्ति, जो आरंभिक फ़िल्मी गीत में आई।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
A song of separation from Himmat (1941), sung by Umrazia Begum to Gobind Ram's composition and Aziz Kashmiri's lyrics. The title frames longing through the imagery of the seasons — a staple device of viraha (separation) poetry carried into early film song.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Slow
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | किस ऋतु में प्रीतम रूठ गए · Kis Ritu Mein Pritam Rooth Gaye |
|---|---|
| फ़िल्म | हिम्मत · 1941 |
| वर्ष · युग | 1941 |
| गायक | उमराज़िया बेगम |
| गीतकार | Aziz Kashmiri |
| संगीतकार | Gobind Ram |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | धीमी |
| भाषा | hindi |
| भाव | विरह · उदास |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
जुड़े हुए पन्ने
Connected Plates · The Graph Made Visibleअटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — इस गीत से जुड़े गीत, कलाकार, फ़िल्म, राग-ताल-विधा, सब यहाँ से खुलते हैं।
मिलते-जुलते गीत · Related Songs
कलाकार · The Artists
फ़िल्म · The Film
साझा कीजिए · Share this Plate
