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किस ऋतु में प्रीतम रूठ गए — हिम्मत (1941) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

किस ऋतु में प्रीतम रूठ गए

Kis Ritu Mein Pritam Rooth Gaye

एक प्रेमिका का विलाप — वह पूछती है, किस ऋतु में उसका प्रीतम रूठ गया?

भावविरह · उदास

भाषाhindi   गतिधीमी   स्वरूपएकल महिला

श्रेय

The Credits
गायक · Singerउमराज़िया बेगमगीतकार · LyricistAziz Kashmiriसंगीतकार · MusicGobind Ram

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

एक प्रेमिका का विलाप — वह पूछती है, किस ऋतु में उसका प्रीतम रूठ गया?

In EnglishA lover's lament — in which season, she asks, did her beloved turn away?

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

हिम्मत (1941) का एक विरह-गीत, उमराज़िया बेगम के स्वर में, रचना गोबिंद राम की और बोल अज़ीज़ कश्मीरी के। शीर्षक ऋतुओं की कल्पना के माध्यम से विरह को ढालता है — विरह-काव्य की एक प्रमुख युक्ति, जो आरंभिक फ़िल्मी गीत में आई।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

A song of separation from Himmat (1941), sung by Umrazia Begum to Gobind Ram's composition and Aziz Kashmiri's lyrics. The title frames longing through the imagery of the seasons — a staple device of viraha (separation) poetry carried into early film song.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Slow

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षककिस ऋतु में प्रीतम रूठ गए · Kis Ritu Mein Pritam Rooth Gaye
फ़िल्महिम्मत · 1941
वर्ष · युग1941
गायकउमराज़िया बेगम
गीतकारAziz Kashmiri
संगीतकारGobind Ram
स्वरूपएकल महिला
गतिधीमी
भाषाhindi
भावविरह · उदास
बोल-स्थितिकेवल झलक

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फ़िल्म · The Film

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