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बढ़ चल रे बढ़ चल रे राहगीर
बढ़ चल रे बढ़ चल रे राहगीर — संगम (1941)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

बढ़ चल रे बढ़ चल रे राहगीर

Badh Chal Re Badh Chal Re Rahagir

संगम (1941) का एक प्रेरक आह्वान — 'बढ़ चल रे राहगीर'।

भावप्रेरणादायक · Marching

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपसमूह

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

संगम (1941) का एक प्रेरक आह्वान — 'बढ़ चल रे राहगीर'।

In EnglishA marching exhortation from Sangam (1941) — 'press on, O traveller.'

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

नवयुग चित्रपट की संगम (1941) का एक समूह-गीत, जिसे वत्सला कुमठेकर ने पवार और सुरेश के साथ गाया, दादा चांदेकर द्वारा रचित और अमृतलाल नागर के बोलों पर। यह गीत एक प्रेरक, आगे-बढ़ने के मुहावरे को अपनाता है, जो एक राहगीर को चलते रहने को कहता है — फ़िल्म के चौदह गीतों में से एक।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

A group song from Navyug Chitrapat's Sangam (1941), sung by Vatsala Kumthekar with Powar and Suresh, composed by Dada Chandekar to lyrics by Amritlal Nagar. The number adopts an inspirational, forward-marching idiom, urging a wayfarer to keep moving — one of the fourteen songs in the film.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकबढ़ चल रे बढ़ चल रे राहगीर · Badh Chal Re Badh Chal Re Rahagir
फ़िल्मसंगम · 1941
वर्ष · युग1941
गायकVatsala Kumthekar, पवार, सुरेश
गीतकारAmritlal Nagar
संगीतकारDada Chandekar
स्वरूपसमूह
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावप्रेरणादायक · Marching
बोल-स्थितिकेवल झलक

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