गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
रात पड़े मत रूठ दीवानी
Raat Pade Mat Rooth Deewani
कांतिलाल की रात की मनुहार — 'रात पड़े, मत रूठ दीवानी' — खेमचंद प्रकाश की धुन पर।
भावपुरानी यादें · रोमांटिक
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल पुरुष
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
कांतिलाल की रात की मनुहार — 'रात पड़े, मत रूठ दीवानी' — खेमचंद प्रकाश की धुन पर।
In EnglishKantilal's nocturnal plea — 'night falls, don't sulk, my love' — set to Khemchand Prakash's melody.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'बम्बई की सैर' (1941) से कांतिलाल का एक पुरुष एकल, 'रात पड़े मत रूठ दीवानी' एक प्रेमी की देर-रात की मनुहार के जाने-पहचाने भाव पर चलता है। यह फ़िल्म के उन कुछ गीतों में से है जिनके लिए एक अकेले गीतकार — पंडित इंद्र — को विशेष रूप से श्रेय दिया गया है, जो शेष संगीत-पट्टी पर लागू सामूहिक चार-लेखक श्रेय से अलग है। संगीत खेमचंद प्रकाश का है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
A male solo by Kantilal from 'Bambai Ki Sair' (1941), 'Raat Pade Mat Rooth Deewani' works the familiar terrain of a lover's late-night coaxing. This is one of the few songs in the film for which a single lyricist — Pandit Indra — is specifically credited, distinct from the collective four-writer attribution that covers most of the soundtrack. The music is by Khemchand Prakash.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | रात पड़े मत रूठ दीवानी · Raat Pade Mat Rooth Deewani |
|---|---|
| फ़िल्म | बम्बई की सैर · 1941 |
| वर्ष · युग | 1941 |
| गायक | Kantilal |
| गीतकार | Pandit Indra |
| संगीतकार | Khemchand Prakash |
| स्वरूप | एकल पुरुष |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | पुरानी यादें · रोमांटिक |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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