हिंदी गीत संगीत का अटलस
इस जग के सुंदर नाटक का हर खेल निराला होता है
इस जग के सुंदर नाटक का हर खेल निराला होता है — हिम्मत (1941)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

इस जग के सुंदर नाटक का हर खेल निराला होता है

Is Jag Ke Sundar Natak Ka Har Khel Nirala Hota Hai

ज़ोहराबाई अंबालेवाली चिंतन करती हैं कि संसार के सुंदर नाटक का हर खेल अपने आप में निराला है।

भावदार्शनिक · Reflective

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपएकल महिला

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

ज़ोहराबाई अंबालेवाली चिंतन करती हैं कि संसार के सुंदर नाटक का हर खेल अपने आप में निराला है।

In EnglishZohrabai Ambalewali muses that every act of the world's beautiful drama is a wonder unto itself.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

हिम्मत (1941) का एक दार्शनिक गीत, ज़ोहराबाई अंबालेवाली के स्वर में, संगीत गोबिंद राम का और बोल अज़ीज़ कश्मीरी के। शीर्षक का रूपक — संसार एक अद्भुत नाटक जिसके दृश्य निरंतर बदलते रहते हैं — गीत को उस दौर के संगीतमय सिनेमा में आम चिंतनशील भाव में रखता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

A philosophical number from Himmat (1941) sung by Zohrabai Ambalewali, with music by Gobind Ram and lyrics by Aziz Kashmiri. The title's metaphor — the world as a wondrous play of ever-changing scenes — places the song in the reflective register common to the period's musical cinema.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकइस जग के सुंदर नाटक का हर खेल निराला होता है · Is Jag Ke Sundar Natak Ka Har Khel Nirala Hota Hai
फ़िल्महिम्मत · 1941
वर्ष · युग1941
गायकZohrabai Ambalewali
गीतकारAziz Kashmiri
संगीतकारGobind Ram
स्वरूपएकल महिला
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावदार्शनिक · Reflective
बोल-स्थितिकेवल झलक

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अटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — इस गीत से जुड़े गीत, कलाकार, फ़िल्म, राग-ताल-विधा, सब यहाँ से खुलते हैं।

फ़िल्म · The Film

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