गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
अरे कहीं देखा है तुम्हें
Arre Kahi Dekha Hai Tumhe
संगम (1941) का वह गीत जो कवि जयशंकर प्रसाद को श्रेय दिया जाता है — आधी-अधूरी पहचान का एक गीत।
भावरोमांटिक · Wistful
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
संगम (1941) का वह गीत जो कवि जयशंकर प्रसाद को श्रेय दिया जाता है — आधी-अधूरी पहचान का एक गीत।
In EnglishThe one Sangam (1941) number credited to the poet Jaishankar Prasad — a song of half-remembered recognition.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
मीनाक्षी द्वारा गाया और दादा चांदेकर द्वारा रचित, यह संगम (1941) का वह गीत है जिसके बोल फ़िल्म के मुख्य गीतकार अमृतलाल नागर के बजाय जयशंकर प्रसाद को श्रेय दिए जाते हैं। इस दौर की किसी फ़िल्म-संगीत-पट्टी में एक प्रमुख छायावाद-युग के हिंदी कवि का नाम होना स्वयं उल्लेखनीय है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Sung by Meenakshi and composed by Dada Chandekar, this is the Sangam (1941) song whose lyrics are credited to Jaishankar Prasad rather than the film's principal lyricist Amritlal Nagar. The presence of a major Chhayavaad-era Hindi poet's name in a film soundtrack of this period is itself notable.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | अरे कहीं देखा है तुम्हें · Arre Kahi Dekha Hai Tumhe |
|---|---|
| फ़िल्म | संगम · 1941 |
| वर्ष · युग | 1941 |
| गायक | Meenakshi Shirodkar |
| गीतकार | जयशंकर प्रसाद |
| संगीतकार | Dada Chandekar |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | रोमांटिक · Wistful |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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