गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
पढ़ोगे लिखोगे होगे ख़राब
Padhoge Likhoge Hoge Kharab
स्कूली कहावत का एक हास्य उलटफेर — पढ़ोगे लिखोगे तो होगे ख़राब, बनोगे नहीं नवाब — जो फ़िल्म से अधिक एक लोक-कहावत के रूप में जीवित रहा।
भावचुलबुला
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपयुगल
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
स्कूली कहावत का एक हास्य उलटफेर — पढ़ोगे लिखोगे तो होगे ख़राब, बनोगे नहीं नवाब — जो फ़िल्म से अधिक एक लोक-कहावत के रूप में जीवित रहा।
In EnglishA comic inversion of the schoolroom proverb — study and you'll be ruined, not rewarded — that outlived the film as a folk catchphrase.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'पढ़ोगे लिखोगे होगे ख़राब' ललकार (1944) का सबसे यादगार नवीनता गीत है, एक हास्य गीत जिसका शीर्षक प्रसिद्ध कहावत 'पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब' को शरारती ढंग से उलट देता है। सी. रामचंद्र द्वारा पंडित मधुर के बोलों पर रचा गया, यह गीत एक लोकप्रिय कहावत बन गया, हालाँकि कुछ विवरणों के अनुसार इसका ऑडियो अब मुश्किल से मिलता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
'Padhoge Likhoge Hoge Kharab' is the best-remembered novelty song from Lalkar (1944), a comic number whose title cheekily inverts the famous proverb 'padhoge likhoge banoge nawab'. Composed by C. Ramchandra to Pandit Madhur's lyrics, the song became a popular catchphrase even though, by some accounts, its audio is now hard to find.
संगीत The Music
सी. रामचंद्र हास्य बोल को एक चुस्त, नोक-झोंक वाले युगल पर बैठाते हैं — ठीक वैसी ही हल्की, संवादात्मक धुन जो आगे चलकर उनके 1940 के दशक के उत्तरार्ध और 1950 के दशक के हास्य गीतों की पहचान बनेगी। हास्य उतना ही ताल और आवाज़ों के चंचल आदान-प्रदान में बसता है जितना पंडित मधुर के शब्द-खेल में।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
C. Ramchandra sets the comic lyric to a brisk, bantering duet — the very sort of light, conversational tune that would become a hallmark of his later 1940s and 1950s comedy songs. The humour lives in the rhythm and the playful exchange of voices as much as in Pandit Madhur's wordplay.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | पढ़ोगे लिखोगे होगे ख़राब · Padhoge Likhoge Hoge Kharab |
|---|---|
| फ़िल्म | ललकार · 1944 |
| वर्ष · युग | 1944 |
| गायक | G.M. Durrani, Zohrabai Ambalewali |
| गीतकार | Pandit Madhur |
| संगीतकार | C. Ramchandra |
| स्वरूप | युगल |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | चुलबुला |
| लोकप्रियता | Known |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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