गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
मुसाफ़िर हँसी ख़ुशी हो पार
Musafir Hansi Khushi Ho Paar
मुसाफ़िर, हँसी-ख़ुशी पार हो जा — सुरेन्द्र जीवन-यात्रा को एक आशीर्वाद में बदल देते हैं।
भावप्रेरणादायक · दार्शनिक
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल पुरुष
श्रेय
The Creditsबोल · The Lyrics
बोल — झलक · Lyrics Preview
मुसाफ़िर हँसी ख़ुशी हो पार।
musaafir hansi khushi ho paar.
कॉपीराइट के कारण केवल झलक — पूरे बोल आधिकारिक मंचों पर।
सूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
मुसाफ़िर, हँसी-ख़ुशी पार हो जा — सुरेन्द्र जीवन-यात्रा को एक आशीर्वाद में बदल देते हैं।
In EnglishTraveller, cross over in joy and laughter — Surendra turns the journey of life into a benediction.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
विश्वास (1943) के अधिक याद किए जाने वाले गीतों में से एक, 'मुसाफ़िर हँसी ख़ुशी हो पार' एक सुरेन्द्र-एकल है जिसे सीतापुर के शायर डॉ. सफ़दर आह सीतापुरी ने लिखा और फ़िरोज़ निज़ामी ने संगीतबद्ध किया। 'मुसाफ़िर' जीवन के पार आत्मा की यात्रा का परिचित रूपक है, और बार-बार आता टेक यात्री को हँसी-ख़ुशी पार उतरने की कामना देता है। यह फ़िल्म के उन गीतों में है जो बोल-दस्तावेज़ों में बचे हैं।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
One of the better-remembered numbers from Vishwas (1943), 'Musafir Hansi Khushi Ho Paar' is a Surendra solo written by the Sitapur poet Dr. Safdar Aah Sitapuri and composed by Firoz Nizami. The 'musafir' (traveller) is the familiar metaphor for the soul's passage through life, and the repeated refrain wishes the traveller a crossing made in joy. It is among the film's songs that survive in lyric documentation.
संगीत The Music
अपनी पहली फ़िल्म का संगीत रचते हुए फ़िरोज़ निज़ामी इस दार्शनिक बोल को एक नपी-तुली, भजन-सी मध्यम लय में बाँधते हैं जिसका बार-बार आता टेक लगभग एक आशीर्वाद की तरह काम करता है। सुरेन्द्र की स्पष्ट, स्थिर आवाज़ — एक गायक-अभिनेता की, न कि प्रशिक्षित शास्त्रीय गायक की — गीत के सादे, निष्कपट संबोधन के अनुकूल है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Firoz Nizami, scoring his very first film, sets the philosophical lyric to a measured, hymn-like medium tempo whose repeated refrain functions almost as a blessing. Surendra's clear, steady voice — that of a singing actor rather than a trained classicist — suits the song's plain, sincere address.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | मुसाफ़िर हँसी ख़ुशी हो पार · Musafir Hansi Khushi Ho Paar |
|---|---|
| फ़िल्म | विश्वास · 1943 |
| वर्ष · युग | 1943 |
| गायक | Surendra |
| गीतकार | Safdar Aah |
| संगीतकार | Feroze Nizami |
| स्वरूप | एकल पुरुष |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | प्रेरणादायक · दार्शनिक |
| लोकप्रियता | Known |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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