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पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला — मिलाप (1937) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला

Pila Raha Hai Toh Kuchh Lutf-e-Mai Badha Ke Pila

“पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला” — 1937 की फ़िल्म मिलाप का एक गीत। संगीत: के.सी. डे। बोल: अप्रलेखित। गायन: अकबर ख़ान दुर्रानी पेशावरी।

फ़िल्ममिलाप (1937)वर्ष1937बोलसार्वजनिक डोमेन

भावतीव्र · उदास · रोमांटिक

भाषाhindi  

श्रेय

The Credits
गायक · Singerअकबर ख़ान दुर्रानी पेशावरीगीतकार · Lyricistअप्रलेखितसंगीतकार · MusicK.C. Dey

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

“पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला” — 1937 की फ़िल्म मिलाप का एक गीत। संगीत: के.सी. डे। बोल: अप्रलेखित। गायन: अकबर ख़ान दुर्रानी पेशावरी।

In English“Pila Raha Hai Toh Kuchh Lutf-e-Mai Badha Ke Pila” — a song from the 1937 film Milap. Music: K.C. Dey. Lyrics: Undocumented. Sung by Akbar Khan Durrani Peshawari.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

“पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला” 1937 की फ़िल्म मिलाप के गीतों में से एक है। इसका संगीत के.सी. डे ने दिया। बोल अप्रलेखित के हैं। इसे अकबर ख़ान दुर्रानी पेशावरी ने गाया।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

“Pila Raha Hai Toh Kuchh Lutf-e-Mai Badha Ke Pila” is one of the songs from Milap (1937). The music is by K.C. Dey. The lyrics are by Undocumented. It was performed by Akbar Khan Durrani Peshawari.

संगीत The Music

“पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला” का संगीत मिलाप (1937) के लिए के.सी. डे ने रचा। स्वर: अकबर ख़ान दुर्रानी पेशावरी।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

“Pila Raha Hai Toh Kuchh Lutf-e-Mai Badha Ke Pila” was set to music by K.C. Dey for the 1937 film Milap. It is rendered by Akbar Khan Durrani Peshawari.

काव्य The Poetry

“पिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला” के बोल अप्रलेखित ने लिखे।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

The words of “Pila Raha Hai Toh Kuchh Lutf-e-Mai Badha Ke Pila” were written by Undocumented.

वर्गीकरण

Classification

Genre

FilmiSocialCostume

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकपिला रहा है तो कुछ लुत्फ़-ए-मय बढ़ा के पिला · Pila Raha Hai Toh Kuchh Lutf-e-Mai Badha Ke Pila
फ़िल्ममिलाप · 1937
वर्ष · युग1937
गायकअकबर ख़ान दुर्रानी पेशावरी
गीतकारअप्रलेखित
संगीतकारK.C. Dey
भाषाhindi
भावतीव्र · उदास · रोमांटिक
लोकप्रियताObscure
बोल-स्थितिसार्वजनिक

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