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उठ जाग सोयेगा तो खोयेगा तू
उठ जाग सोयेगा तो खोयेगा तू — मंथन (1941)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

उठ जाग सोयेगा तो खोयेगा तू

Uth Jaag Soyega To Khoyega Tu

जागने का एक प्रेरक आह्वान — 'उठ जाग, सोयेगा तो खोयेगा तू' — मंथन (1941) में दिलावर द्वारा गाया गया।

भावप्रेरणादायक · दार्शनिक

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपSolo

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

जागने का एक प्रेरक आह्वान — 'उठ जाग, सोयेगा तो खोयेगा तू' — मंथन (1941) में दिलावर द्वारा गाया गया।

In EnglishA rousing call to wake — 'rise and awake, if you sleep you will lose' — sung by Dilavar in Manthan (1941).

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

'उठ जाग सोयेगा तो खोयेगा तू' मंथन (1941) के लिए दिलावर गाते हैं, संगीत बलदेव नायक का और बोल पंडित फणी के। शीर्षक जागने का एक आह्वान है — 'उठ, जाग; सोयेगा तो खोयेगा' — एक उपदेशात्मक, प्रेरक स्वर जो 1940 के दशक के आरंभ की सामाजिक फ़िल्मों में बुने सुधारवादी और प्रेरणादायी गीतों से जुड़ता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

'Uth Jaag Soyega To Khoyega Tu' is sung by Dilavar for Manthan (1941), with music by Baldev Nayak and lyrics by Pandit Phani. The title is a wake-up exhortation — 'rise, awake; if you sleep, you will lose' — a didactic, motivational register that connects to the reformist and inspirational songs woven through the social films of the early 1940s.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकउठ जाग सोयेगा तो खोयेगा तू · Uth Jaag Soyega To Khoyega Tu
फ़िल्ममंथन · 1941
वर्ष · युग1941
गायकदिलावर
गीतकारPandit Phani
संगीतकारBaldev Nayak
स्वरूपSolo
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावप्रेरणादायक · दार्शनिक
बोल-स्थितिकेवल झलक

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