गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
पत राखे भगवान मेरी
Pat Rakhe Bhagwan Meri
मंथन (1941) के इस भक्ति गीत में राजकुमारी ईश्वर से रक्षा की याचना करती हैं — 'पत राखे भगवान मेरी'।
भावभक्ति · आध्यात्मिक
भाषाhindi गतिधीमी स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
मंथन (1941) के इस भक्ति गीत में राजकुमारी ईश्वर से रक्षा की याचना करती हैं — 'पत राखे भगवान मेरी'।
In EnglishRajkumari pleads for divine protection — 'keep my honour, O Lord' — in this devotional number from Manthan (1941).
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'पत राखे भगवान मेरी' मंथन (1941) के लिए राजकुमारी गाती हैं, संगीत बलदेव नायक का और बोल पंडित फणी के। शीर्षक एक की लाज-मर्यादा ('पत') की रक्षा की प्रार्थना है — एक भक्तिमय निवेदन जो भक्ति परंपरा की प्रतिध्वनि करता है और 1940 के दशक की सामाजिक फ़िल्मों में नायिका के आध्यात्मिक या संकट के क्षणों का अनिवार्य अंग था।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
'Pat Rakhe Bhagwan Meri' is sung by Rajkumari for Manthan (1941), with Baldev Nayak's music and Pandit Phani's lyrics. The title is a prayer for the preservation of one's honour ('pat'/'pat-rakha') — a devotional appeal that echoes the bhakti tradition and was a staple of the heroine's spiritual or crisis moments in social films of the 1940s.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Slow
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | पत राखे भगवान मेरी · Pat Rakhe Bhagwan Meri |
|---|---|
| फ़िल्म | मंथन · 1941 |
| वर्ष · युग | 1941 |
| गायक | Rajkumari |
| गीतकार | Pandit Phani |
| संगीतकार | Baldev Nayak |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | धीमी |
| भाषा | hindi |
| भाव | भक्ति · आध्यात्मिक |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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