गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
बलिहारी रे कुकड़ूँ बोल
Balahaari Re Kukadakun Bol
मुर्गे की भोर की बाँग एक गीत बन जाती है — जी. एम. दुर्रानी 'शारदा' के लोक-रंगी गीतों में से एक गाते हैं।
भावउत्सव · चुलबुला
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल पुरुष
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
मुर्गे की भोर की बाँग एक गीत बन जाती है — जी. एम. दुर्रानी 'शारदा' के लोक-रंगी गीतों में से एक गाते हैं।
In EnglishThe rooster's dawn crow becomes a song — G. M. Durrani sings one of Sharda's folk-flavoured numbers.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'बलिहारी रे कुकड़ूँ बोल' 'शारदा' (1942) में जी. एम. दुर्रानी के एकल गीतों में से एक है, जो मुर्गे की सुबह की बाँग की ध्वन्यात्मक छवि के इर्द-गिर्द बुना गया है। बोल की लोक-ग्रामीण बनावट इसे संगीत-पट्टी के हल्के, अधिक लयात्मक गीतों में रखती है, और यह याद दिलाती है कि अपने पहले प्रमुख काम में भी नौशाद उस ग्राम-गीत मुहावरे का सहारा ले रहे थे जो उनके बाद के, अधिक प्रसिद्ध काम की पहचान बनेगा।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
'Balahaari Re Kukadakun Bol' is one of the G. M. Durrani solos in Sharda (1942), built around the onomatopoeic image of the rooster's morning call. The folk-rural texture of the lyric places it among the score's lighter, more rhythmic pieces, a reminder that even in his first prominent assignment Naushad was already drawing on the village-song idiom that would mark his later, more famous work.
संगीत The Music
नौशाद इस गीत को एक तेज़, लयात्मक आधार देते हैं — ढोलक और तबला एक लोक-नृत्य की थाप चलाते हैं — जिसके ऊपर दुर्रानी चंचल टेक प्रस्तुत करते हैं। यह रचना उन देहाती, लय-प्रधान गीतों का पूर्वाभास देती है जो आगे चलकर नौशाद की पहचान बनेंगे, यहाँ एक आरंभिक और मामूली रूप में।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Naushad gives the number a brisk, rhythmic footing — dholak and tabla driving a folk-dance pulse — over which Durrani delivers the playful refrain. The composition foreshadows the rustic, rhythm-forward songs that would become a Naushad signature, here in an early and modest form.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | बलिहारी रे कुकड़ूँ बोल · Balahaari Re Kukadakun Bol |
|---|---|
| फ़िल्म | शारदा · 1942 |
| वर्ष · युग | 1942 |
| गायक | G.M. Durrani |
| गीतकार | D. N. Madhok |
| संगीतकार | Naushad |
| स्वरूप | एकल पुरुष |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | उत्सव · चुलबुला |
| लोकप्रियता | Known |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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