गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
अलबेला जीवन एक पगली
Albela Jivan Ek Pagli
जीवन की लापरवाह चंचलता पर एक चुटीला चिंतन — जीवन, अलबेला और थोड़ा पगला।
भावचुलबुला · Reflective
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपएकल महिला
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
जीवन की लापरवाह चंचलता पर एक चुटीला चिंतन — जीवन, अलबेला और थोड़ा पगला।
In EnglishA wry meditation on life's carefree caprice — jivan, albela and a little mad.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
के. अमरनाथ की 1942 की सामाजिक ड्रामा ज़ेवर के लिए पंडित बद्री प्रसाद के संगीत के आठ गीतों में से एक, बोल डी. एन. माधोक के। शीर्षक का जीवन को 'अलबेला' (बेफ़िक्र, मस्त) और थोड़ा 'पगली' (दीवाना) कहकर प्रस्तुत करना इसे एक दार्शनिक-चंचल गीत के रूप में चिह्नित करता है — जीने पर वह आधा-उजला, आधा-खेदपूर्ण चिंतन जो 1940 के दशक का हिंदी सिनेमा अक्सर एक विचारशील नायिका को सौंपता था।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
One of eight songs in Pandit Badri Prasad's score for K. Amarnath's 1942 social drama Zevar, with lyrics by D. N. Madhok. The title's framing of life as 'albela' (carefree, jaunty) and a little 'pagli' (mad) marks it as a philosophical-playful number, the kind of half-light, half-rueful reflection on living that 1940s Hindi cinema often handed to a thoughtful heroine.
संगीत The Music
बद्री प्रसाद उस दौर के सुगम-शास्त्रीय फ़िल्म मुहावरे में काम करते हैं, जहाँ एक अकेली निरंतर गायन-पंक्ति को हारमोनियम और तबला सहारा देते हैं। इस प्रकार की चिंतनशील-चंचल पंक्ति को आमतौर पर एक उछाल भरी मध्यम लय पर बैठाया जाता, जहाँ धुन 'अलबेला' टेक पर उठती और अंतर्मुखी पंक्तियों पर कोमल होती।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Badri Prasad works within the light-classical film idiom of the period, where a single sustained vocal line is supported by harmonium and tabla. A reflective-playful lyric of this kind would typically be set to a buoyant medium tempo, the melody lifting on the 'albela' refrain and softening on the introspective lines.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | अलबेला जीवन एक पगली · Albela Jivan Ek Pagli |
|---|---|
| फ़िल्म | ज़ेवर · 1942 |
| वर्ष · युग | 1942 |
| गीतकार | D. N. Madhok |
| संगीतकार | Pandit Badri Prasad |
| स्वरूप | एकल महिला |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | चुलबुला · Reflective |
| लोकप्रियता | Obscure |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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