शास्त्र विंग · ताल-पट्टिका · Taal Plate
सूलताल
Sultaal · Sūltāl
ध्रुपद की गहन, ध्यानमग्न ताल · The profound, meditative rhythm of dhrupad
एक पंक्तिदस मात्रा की ताल, ध्रुपद परंपरा का मुख्य आधार, प्राचीन और गंभीर · A ten-beat taal, the foundation of dhrupad tradition, ancient and profound
अन्य नामसूल ताल · Sool Taal
ताल-कुंडली · The Taal Specimen
सूलताल का पूरा नक़्शा · Anatomy of the Cycle
दस मात्रा में विभाजित पाँच भाग, प्रत्येक दो मात्रा का। गहरे 'धा' से शुरू होकर एक मजबूत, स्थिर लय बनाता है।
| ठेका · बोल | धा धा | दिन् ता | किट धा | तिट कत | गदि गन Dhā dhā | Din tā | Kit dhā | Tit kat | Gadi gan |
|---|---|
| मात्राएँ | १० — 10 मात्राओं का चक्र |
| विभाग | ५ (2+2+2+2+2) —
प्रथम विभाग (2 मात्रा): धा धा — दोहरी गहरी आवाज़, शक्तिशाली आधार द्वितीय विभाग (2 मात्रा): दिन् ता — तेज़ी की गूँज तृतीय विभाग (2 मात्रा): किट धा — मध्य-बिंदु, संतुलन चतुर्थ विभाग (2 मात्रा): तिट कत — तेज़ी जारी रहती है पंचम विभाग (2 मात्रा): गदि गन — अंत की ओर, साम की तैयारी First Section (2) · Second Section (2) · Third Section (2) · Fourth Section (2) · Fifth Section (2) |
| सम | मात्रा १ — प्रथम मात्रा 'धा धा' पर साम आता है। |
| ताली · ख़ाली |
● ताली — मात्रा १ (मज़बूत ताली — साम, चक्र की शुरुआत) · ● ताली — मात्रा ५ (ताली — तृतीय विभाग के प्रारंभ में) · ● ताली — मात्रा ९ (ताली — पंचम विभाग के प्रारंभ में) · ○ ख़ाली — मात्रा ३ (खाली — द्वितीय विभाग में तरंग) · ○ ख़ाली — मात्रा ७ (खाली — चतुर्थ विभाग में तरंग) सूलताल का ताली-खाली पैटर्न उसकी गहन, ध्रुपद-आधारित प्रकृति को दर्शाता है। |
| लिप्यंतरण | Sūltāl |
सीखिए · Learn to Count
गिनती और ताली · How to Count & Clap
कैसे गिनें How to Count
सूलताल को गिनते समय ध्रुपद की धीमी, ध्यानमग्न गति को ध्यान में रखें। ताल को धीरे-धीरे, गहराई से गिनते हैं। पखावज पर खेलते समय, प्रत्येक विभाग में अलग-अलग 'पल्ली' (stroke) का प्रयोग किया जाता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
When counting Sultaal, keep in mind dhrupad's slow, meditative pace. Count the taal gradually and deeply. When played on pakhawaj, each section uses different strokes.
ताली बजाने का तरीक़ा How to Clap Along
हाथ से ताली देने का पारंपरिक तरीका
रूप-भेद और नृत्य
Variations & Danceलयकारी की संभावनाएँ
Layakariसूलताल में लयकारी संभव है, किंतु ध्रुपद की परंपरा में लयकारी अपेक्षाकृत रूढ़िवादी होती है। द्रुत लयकारी का प्रयोग कम होता है — अधिकतर मध्य-गति की लयकारी ही प्रचलित है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Layakari is possible in Sultaal, but in the dhrupad tradition, it remains relatively conservative. Rapid layakari is uncommon; medium-speed variations dominate.
लय १ · Layakari
दो-गुण: ताल की गति को दोगुनी करना, किंतु ध्रुपद शैली में सूक्ष्मता बनाए रखना।
लय २ · Layakari
त्रिपुट: तीन-भाग की रचना, विशेषकर ध्रुपद के अंत में।
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Introduction
सूलताल एक दस-मात्रा की ताल है जो मुख्य रूप से ध्रुपद परंपरा से जुड़ी है। यह ध्रुपद के सबसे महत्त्वपूर्ण और परंपरागत तालों में से एक माना जाता है। नाम संभवतः 'सूल' (त्रिशूल) से आता है, जो शिव का प्रतीक है, जो ध्रुपद की आध्यात्मिक प्रकृति को दर्शाता है। सूलताल की संरचना पाँच, दो-मात्रा के विभागों में विभाजित है, जो इसे एक सुसंगठित और मजबूत ताल बनाता है। यह ताल पखावज (ध्रुपद का पारंपरिक वाद्य) पर विशेषकर प्रभावी है, जहाँ पखावज के विभिन्न स्ट्रोक्स सूलताल की संरचना को पूरी तरह व्यक्त करते हैं। सूलताल की गहन, ध्यानमग्न प्रकृति इसे 'चौताल' (जो १२ मात्रा की है) और 'झपताल' (जो १० मात्रा की है) से अलग बनाती है। जबकि झपताल मध्य-गति या तेज़ गति के ख़याल और तबला सोलो में अधिक प्रयुक्त होता है, सूलताल ध्रुपद की धीमी, गहन परंपरा का प्रतीक है। आजकल, सूलताल एक अपेक्षाकृत दुर्लभ ताल बन गई है। ध्रुपद परंपरा के क्षीण होने के साथ-साथ, सूलताल की भी प्रामाणिक प्रस्तुतियाँ दुर्लभ हो गई हैं। कुछ जाने-माने दगर भाई (ध्रुपद की एक विशिष्ट परंपरा) अभी भी सूलताल को प्रदर्शित करते हैं।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Sultaal is a ten-beat taal primarily associated with the dhrupad tradition. It is considered one of dhrupad's most important and canonical taals. Its name likely derives from 'sool' (trident), Shiva's symbol, reflecting dhrupad's spiritual nature.
Sultaal's structure divides into five two-beat sections, making it a well-organized, powerful taal. It is particularly effective on the pakhawaj (dhrupad's traditional percussion), where pakhawaj strokes fully express Sultaal's structure.
Sultaal's profound, meditative nature distinguishes it from Chautaal (12-beat) and Jhaptaal (10-beat). While Jhaptaal dominates medium and fast-tempo khayal and tabla solos, Sultaal embodies dhrupad's slow, deep tradition.
Today, Sultaal has become relatively rare. As the dhrupad tradition has weakened, authentic Sultaal performances are uncommon. Some renowned Dagar brothers (a specific dhrupad lineage) still perform Sultaal.
सांस्कृतिक महत्व Cultural Significance
सूलताल ध्रुपद परंपरा का कोर है। यह केवल एक लयात्मक संरचना नहीं है, बल्कि ध्रुपद की आध्यात्मिक और दार्शनिक गहनता का प्रतिनिधित्व करता है। ध्रुपद में, ताल और संगीत एक-दूसरे से अलग नहीं होते — वे एक साथ एक गहन आध्यात्मिक अनुभव बनाते हैं। सूलताल इसी एकता का सूचक है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Sultaal is the core of the dhrupad tradition. It is not merely a rhythmic structure but represents dhrupad's spiritual and philosophical depth. In dhrupad, taal and music are inseparable—they together create a profound spiritual experience. Sultaal is the emblem of this unity.
श्रवण-मार्गदर्शिका Listening Guide
सूलताल को सुनते समय, ध्रुपद की धीमी, गहन प्रकृति को समझें। गायक पहली बार में कुछ शब्दों को बहुत धीरे-धीरे, सूक्ष्मता से गाता है। सूलताल की संरचना इसी धीमेपन को समर्थन देती है। पखावज की आवाज़ को भी ध्यान से सुनें — प्रत्येक स्ट्रोक सूलताल की संरचना को प्रतिबिंबित करता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
When listening to Sultaal, appreciate dhrupad's slow, profound nature. The vocalist sings words very slowly and subtly. Sultaal's structure supports this slowness. Listen carefully to the pakhawaj—each stroke reflects Sultaal's structure.
अन्य विवरण
More DetailsReferences
काव्य-पंक्ति · The Couplet
सूलताल पर शेर
सूलताल की गहनता में बैठी है ध्रुपद की आत्मा, पखावज की प्रत्येक गूँज ले जाती है आध्यात्मिकता।
RenderingIn Sultaal's depths dwells the soul of dhrupad, Each pakhawaj stroke carries the divine. — हिंदीगीत.इन
इतिहास
History of the Cycleउद्भव — प्राचीन-मध्य काल (१२वीं-१६वीं सदी) Origin · Ancient-Medieval Period (12th-16th century)
सूलताल की उत्पत्ति ध्रुपद परंपरा के विकास के साथ जुड़ी है। यह माना जाता है कि यह ताल ध्रुपद के आरंभिक काल से ही प्रयुक्त हो रही है। कुछ विद्वानों का मानना है कि सूलताल मुगल काल के दरबारों में प्रचलित थी।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Sultaal's origin is linked to the development of the dhrupad tradition. It is believed to have been used since dhrupad's early period. Some scholars believe Sultaal was prevalent in Mughal courts.
विकास-क्रम Evolution
- १२वीं-१६वीं सदी सूलताल ध्रुपद के साथ-साथ विकसित होती रही।
- १७वीं-१८वीं सदी ध्रुपद की विभिन्न परंपराओं में सूलताल की अपनी-अपनी शैलियाँ विकसित हुईं।
- १९वीं-२०वीं सदी दगर घराने और अन्य ध्रुपद-परंपराओं में सूलताल का संरक्षण।
पड़ाव Key Milestones
- १२वीं सदी: ध्रुपद परंपरा में सूलताल का प्रारंभिक प्रयोग ध्रुपद परंपरा में सूलताल का प्रारंभिक प्रयोग
- १६वीं-१७वीं सदी: दगर घराने में सूलताल की स्वीकृति १६वीं-१७वीं सदी: दगर घराने में सूलताल की स्वीकृति
- १९वीं सदी: संगीत-ग्रंथों में सूलताल का विस्तृत उल्लेख संगीत-ग्रंथों में सूलताल का विस्तृत उल्लेख
स्वर्ण काल — १६००-१८०० The Golden Period
यह काल सूलताल के संरक्षण और प्रयोग का सर्वश्रेष्ठ समय था। दरबारी संगीत परंपरा में सूलताल एक प्रमुख ताल थी।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
A period of peak use and prestige for Sultaal in court music traditions.
आज की स्थिति Modern Status
आजकल, ध्रुपद परंपरा के क्षीण होने के साथ-साथ, सूलताल भी दुर्लभ बन गई है। केवल कुछ विशेषज्ञ ध्रुपद-गायक ही सूलताल में गाते हैं। शास्त्रीय संगीत के संरक्षण के प्रयासों में, सूलताल को बचाना एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य बन गया है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
Today, with the weakening of the dhrupad tradition, Sultaal has become rare. Only specialist dhrupad singers perform in Sultaal. Its preservation is now a priority in classical music conservation.
रोचक तथ्य
Margin Notesसूलताल दस मात्रा की है, ठीक झपताल की तरह, किंतु दोनों बिल्कुल अलग हैं।
सूलताल मुख्य रूप से पखावज पर खेली जाता है, तबले पर नहीं।
ध्रुपद परंपरा में, सूलताल का प्रयोग अत्यंत औपचारिक और परंपरागत माना जाता है।
दगर घराने की ध्रुपद परंपरा में सूलताल एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है।
सूलताल की संरचना (५ विभाग, २+२+२+२+२) इसे अन्य दस-मात्रा तालों से अलग बनाती है।
क्या आप जानते हैं?
Did You Knowसूलताल और झपताल दोनों दस मात्रा हैं, किंतु उनके अनुप्रयोग पूरी तरह अलग हैं।
झपताल ख़याल और तबला सोलो में प्रयुक्त होता है, जबकि सूलताल ध्रुपद के लिए है।
कुछ प्राचीन संगीत-ग्रंथों में सूलताल को 'चारताल' या अन्य नामों से भी जाना जाता है।
सूलताल के पखावज-प्रदर्शन में, प्रत्येक 'पल्ली' (stroke) का एक विशेष अर्थ है।
सूक्तियाँ
Quotesजुड़े हुए पन्ने
Connected Plates · The Graph Made Visibleअटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — सूलताल से विधाएँ, राग और गीत, सब जुड़े हैं।
इन विधाओं की धड़कन · Vidhas in Sultaal
राग-साथी · Raag Pairings
श्रवण-कक्ष · The Listening Room
सुनिए — सूलताल · Hear the Cycle
सूलताल — ध्रुपद में सूलताल की थेका और व्याख्या — सूलताल की थेका और पखावज पर इसके प्रदर्शन को विस्तार से समझाया गया है। (3K views) Sultaal — Theka and Explanation in Dhrupad
सूलताल — विस्तृत शिक्षा और पखावज-प्रदर्शन — सूलताल को पखावज पर विभिन्न स्ट्रोक्स के साथ समझाया गया है। (3.7K views) Sultaal — Detailed Teaching and Pakhawaj Performance
सूलताल — ध्रुपद-प्रदर्शन (मालकौंस) — मालकौंस राग में सूलताल पर एक प्रामाणिक ध्रुपद-प्रदर्शन। (20K views) Sultaal — Dhrupad Performance (Malkauns)
दगर घराने के मास्टर्स द्वारा सूलताल में ध्रुपद-प्रदर्शन (यदि उपलब्ध हो) — See recommended listening section
मालकौंस राग में सूलताल (गहन, अंतर्मुखी) — See recommended listening section
भैरव राग में सूलताल (प्रहारपूर्ण, औपचारिक) — See recommended listening section
प्रश्नोत्तर
Questions & Answersसूलताल क्या है?
सूलताल एक दस-मात्रा की ताल है जो मुख्य रूप से ध्रुपद परंपरा में प्रयुक्त होता है। यह पखावज पर खेली जाती है और ध्रुपद की गहन, ध्यानमग्न प्रकृति को व्यक्त करती है। नाम संभवतः 'सूल' (त्रिशूल) से आता है।
सूलताल और झपताल में क्या अंतर है?
दोनों दस-मात्रा की हैं, किंतु उनके अनुप्रयोग पूरी तरह अलग हैं। सूलताल ध्रुपद के लिए है (पखावज पर), जबकि झपताल ख़याल और तबला सोलो (तबले पर) में प्रयुक्त होता है। उनकी थेका और संरचना भी पूरी तरह अलग हैं।
सूलताल की थेका क्या है?
सूलताल की थेका है: 'धा धा | दिन् ता | किट धा | तिट कत | गदि गन'। यह दस मात्रा में विभाजित है पाँच, दो-मात्रा के विभागों में।
सूलताल किन राgas में गाई जाती है?
सूलताल गहन राages में गाई जाती है: मालकौंस, भैरव, दरबारी कान्हड़ा आदि। ये सभी गंभीर, आध्यात्मिक राages हैं जो ध्रुपद के लिए परंपरागत हैं।
सूलताल केवल ध्रुपद में ही प्रयुक्त होता है?
मुख्य रूप से हाँ, सूलताल ध्रुपद परंपरा के लिए ही है। कभी-कभी कुछ विशेष खयाल संरचनाओं में भी इसका प्रयोग होता है, किंतु यह अत्यंत दुर्लभ है।
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सवाल-जवाब
Questions & Answersसूलताल क्या है? · What is Sultaal?
सूलताल एक दस-मात्रा की ताल है जो मुख्य रूप से ध्रुपद परंपरा में प्रयुक्त होता है। यह पखावज पर खेली जाती है और ध्रुपद की गहन, ध्यानमग्न प्रकृति को व्यक्त करती है। नाम संभवतः 'सूल' (त्रिशूल) से आता है।
सूलताल और झपताल में क्या अंतर है? · What is the difference between Sultaal and Jhaptaal?
दोनों दस-मात्रा की हैं, किंतु उनके अनुप्रयोग पूरी तरह अलग हैं। सूलताल ध्रुपद के लिए है (पखावज पर), जबकि झपताल ख़याल और तबला सोलो (तबले पर) में प्रयुक्त होता है। उनकी थेका और संरचना भी पूरी तरह अलग हैं।
सूलताल की थेका क्या है? · What is the theka of Sultaal?
सूलताल की थेका है: 'धा धा | दिन् ता | किट धा | तिट कत | गदि गन'। यह दस मात्रा में विभाजित है पाँच, दो-मात्रा के विभागों में।
सूलताल किन राgas में गाई जाती है? · In which raags is Sultaal used?
सूलताल गहन राages में गाई जाती है: मालकौंस, भैरव, दरबारी कान्हड़ा आदि। ये सभी गंभीर, आध्यात्मिक राages हैं जो ध्रुपद के लिए परंपरागत हैं।
सूलताल केवल ध्रुपद में ही प्रयुक्त होता है? · Is Sultaal used only in dhrupad?
मुख्य रूप से हाँ, सूलताल ध्रुपद परंपरा के लिए ही है। कभी-कभी कुछ विशेष खयाल संरचनाओं में भी इसका प्रयोग होता है, किंतु यह अत्यंत दुर्लभ है।


