हिंदी गीत संगीत का अटलस
16मात्रा
अड्ढा ताल-चक्र — 4 विभाग (4+4+4+4) · लाल = सम (मात्रा १) · कटी रेखा = ख़ाली (मात्रा ९) Engraved beat-wheel · 16 matras · vibhag 4+4+4+4

शास्त्र विंग · ताल-पट्टिका · Taal Plate

अड्ढा

Addha · Addhā

पंजाबी/सिख परंपरा की तेज़ लय वाली ताल · The bouncy rhythm of Punjabi and Sikh tradition

मात्राएँ१६विभाग४ — 4+4+4+4घरगुरबानी किर्तनसम · ख़ालीमात्रा १ · मात्रा ९
ठेका · The Bol

एक पंक्तिसोलह मात्रा की ताल, तीनताल का पंजाबी भाई, गुरबानी संगीत का दिल · A sixteen-beat taal, Punjab's answer to Teentaal, the heartbeat of Gurbani kirtan

अन्य नामअड्ढा ताल · अड्ढा तीनताल · Addha Taal · Addha Teentaal

ताल-कुंडली · The Taal Specimen

अड्ढा का पूरा नक़्शा · Anatomy of the Cycle

सोलह मात्रा में विभाजित चार भाग, प्रत्येक चार मात्रा का। तीनताल के समान, किंतु पंजाबी संगीत की विशिष्ट 'उछाल' वाली प्रकृति के साथ।

विनिर्देश · Specimen Rows
ठेका · बोल धा तिरकिट धिन् ना | ता तिरकिट धिन् ना | धा तिरकिट धिन् ना | धा धा तिरकिट धिन् ना
Dhā tirkiṭ dhin nā | Tā tirkiṭ dhin nā | Dhā tirkiṭ dhin nā | Dhā dhā tirkiṭ dhin nā
मात्राएँ १६ — 16 मात्राओं का चक्र
विभाग ४ (4+4+4+4) — प्रथम विभाग (4 मात्रा): धा तिरकिट धिन् ना — ठोस, गहरी शुरुआत, साम की ऊर्जा द्वितीय विभाग (4 मात्रा): ता तिरकिट धिन् ना — हल्का-फुल्का, तेज़, तरंग का प्रवाह तृतीय विभाग (4 मात्रा): धा तिरकिट धिन् ना — पुनः गहरा, मध्य-बिंदु चतुर्थ विभाग (4 मात्रा): धा धा तिरकिट धिन् ना — दोहरी शुरुआत, समापन, साम की ओर

First Section (4) · Second Section (4) · Third Section (4) · Fourth Section (4)

सम मात्रा १ — प्रथम मात्रा पर साम आता है, जहाँ से चक्र शुरू होता है।
ताली · ख़ाली ● ताली — मात्रा १ (मज़बूत ताली — साम, चक्र की शुरुआत) · ● ताली — मात्रा ५ (ताली — द्वितीय विभाग का प्रारंभ) · ● ताली — मात्रा १३ (ताली — चतुर्थ विभाग का प्रारंभ) · ○ ख़ाली — मात्रा ९ (खाली — तृतीय विभाग में, हाथ की लहर)

अड्ढा का ताली-खाली पैटर्न तीनताल के समान है, किंतु अड्ढे की विशिष्ट 'पंजाबी उछाल' के साथ।

लिप्यंतरणAddhā

सीखिए · Learn to Count

गिनती और ताली · How to Count & Clap

कैसे गिनें How to Count

अड्ढे को गिनते समय पंजाबी संगीत की विशिष्ट 'उछाल' को महसूस करें। मध्य गति में १२-१६ मात्रा प्रति मिनट की दर से गिनते हैं। प्रत्येक चार मात्राओं का एक विभाग है, और सभी विभागों को सुसंगति से जोड़ा जाता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

When counting Addha, feel the distinctive 'bounce' of Punjabi music. In moderate tempo, maintain 12-16 matras per minute. Each four-beat section flows smoothly into the next.

ताली बजाने का तरीक़ा How to Clap Along

हाथ से ताली देने का पारंपरिक पंजाबी तरीका

ताली-पैटर्न मात्रा १, ५, १३ पर मज़बूत ताली। मात्रा ९ पर खाली (हल्की लहर)। पंजाबी संगीत में, ताली देते समय 'उछाल' (bounce) महत्त्वपूर्ण है।
तबलों की एक छवि, जो अड्ढे की पंजाबी ऊर्जा को प्रतिबिंबित करती है
तबलों की एक छवि, जो अड्ढे की पंजाबी ऊर्जा को प्रतिबिंबित करती है wikimedia · CC BY-SA

रूप-भेद और नृत्य

Variations & Dance
ताल-रूप · Variantगुरबानी अड्ढागुरु ग्रंथ साहिब के भजनों (शबद) में प्रयुक्त संस्करण, सबसे पवित्र और प्रामाणिक।Gurbani Addhaताल-रूप · Variantपंजाबी लोक अड्ढापंजाबी लोकगीतों और परंपरागत संगीत में विभिन्न भिन्नताएँ।Punjabi Folk Addha
नृत्य-संबंध — भांगड़ा अड्ढे की तेज़, उछाल-भरी प्रकृति भांगड़े नृत्य के लिए आदर्श है। भांगड़े की सभी मुख्य चाल अड्ढे की लय में ही बनी हैं।
Bhangra · Addha's bouncy, energetic nature is perfect for bhangra. All major bhangra movements are choreographed to Addha's rhythm.
नृत्य-संबंध — गिद्दा महिलाओं का पंजाबी परंपरागत नृत्य, जो अड्ढे में ही प्रदर्शित होता है। Gidda · Women's traditional Punjabi dance, performed exclusively in Addha.

लयकारी की संभावनाएँ

Layakari

अड्ढे में लयकारी संभव है और परंपरागत है। गुरबानी किर्तन में, विविध लयकारी का प्रयोग किया जाता है। पंजाबी संगीत परंपरा में, लयकारी को 'तेहराई' (acceleration) कहा जाता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Layakari is possible and traditional in Addha. In Gurbani kirtan, varied layakari is employed. In Punjabi tradition, layakari is called 'tehrai' (acceleration).

लय १ · Layakari

दो-गुण (दोगुन): ताल की गति को दोगुनी करना।

लय २ · Layakari

त्रिपुट और तिहाई: तीन-भाग की रचना, साम पर समाप्त करना।

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Introduction

अड्ढा (अर्ध-तीनताल) एक सोलह-मात्रा की ताल है जो मुख्य रूप से पंजाबी और सिख संगीत-परंपरा से जुड़ी है। यह तीनताल के समान है (दोनों समान मात्रा-विभाग हैं: ४+४+४+४), किंतु अड्ढे की विशेषता है इसकी विशिष्ट 'उछाल' (bounce) — एक ऐसा लयात्मक गुण जो पंजाबी संगीत की आत्मा है। अड्ढा का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रयोग गुरु ग्रंथ साहिब के सभी शबदों (भजनों) में है। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव से लेकर आज तक, सभी गुरबानी संगीत अड्ढे में ही गाया जाता है। गुरुद्वारों में, हर सुबह-शाम, अड्ढे की लय में ही कीर्तन होता है। अड्ढे की पहचान इसके विशिष्ट थेका में है: 'धा तिरकिट धिन् ना | ता तिरकिट धिन् ना | धा तिरकिट धिन् ना | धा धा तिरकिट धिन् ना'। यह 'तिरकिट' (एक तेज़, तीन-बीट का अनुक्रम) अड्ढे को तीनताल से अलग करता है। इसी 'तिरकिट' की वजह से अड्ढे में एक विशिष्ट 'पंजाबी उछाल' होती है, जो श्रोताओं को तत्काल संबंधित कर देती है। अड्ढा न केवल शास्त्रीय संगीत है, बल्कि यह पंजाबी संस्कृति की भी प्रतीक है। भांगड़े, गिद्दे, और अन्य पंजाबी लोक-नृत्यों में अड्ढे की लय अनिवार्य है। पंजाबी शादियों में जो गीत गाए जाते हैं (जैसे 'बिहा' या 'छजली'), वे सभी अड्ढे में ही होते हैं। आधुनिक पंजाब में, भांगड़े का विश्व-व्यापी प्रसार हुआ है, और इसके साथ अड्ढे का भी नाम फैल गया है। लेकिन, अड्ढे की वास्तविक गरिमा गुरबानी संगीत में निहित है, जहाँ यह एक आध्यात्मिक साधना का माध्यम है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Addha (half-Teentaal) is a sixteen-beat taal primarily linked to Punjabi and Sikh music tradition. It is structurally similar to Teentaal (both have 4+4+4+4 sections), but Addha's defining characteristic is its distinctive 'bounce'—a rhythmic quality that embodies the Punjabi spirit.

Addha's most important role is in all shabads (hymns) from Guru Granth Sahib. From Guru Nanak Dev to today, all Gurbani music is sung in Addha. In gurdwaras worldwide, every morning and evening, kirtan is performed in Addha's rhythm.

Addha's identity lies in its distinctive theka: 'Dhā tirkiṭ dhin nā | Tā tirkiṭ dhin nā | Dhā tirkiṭ dhin nā | Dhā dhā tirkiṭ dhin nā'. The 'tirkit' (a rapid three-beat sequence) distinguishes Addha from Teentaal. This 'tirkit' creates Addha's characteristic Punjabi bounce.

Addha is not only classical music but also a symbol of Punjabi culture. In bhangra, gidda, and other Punjabi folk dances, Addha's rhythm is essential. In Punjabi wedding songs (biha, chhajli), Addha is always present.

With bhangra's global spread, Addha's name has traveled worldwide. Yet its true dignity lies in Gurbani music, where it is a vehicle for spiritual practice.

सांस्कृतिक महत्व Cultural Significance

अड्ढा पंजाब की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है। सिख धर्म के लिए, अड्ढा केवल एक ताल नहीं है — यह गुरु ग्रंथ साहिब के साथ सीधा जुड़ाव है। जब कोई व्यक्ति अड्ढे में कीर्तन सुनता है, तो वह पंजाबी संस्कृति और सिख आध्यात्मिकता दोनों को महसूस करता है। भांगड़ा के माध्यम से, अड्ढा विश्व-भर में पंजाबी उछाल और ऊर्जा का प्रतीक बन गया है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Addha is Punjab's cultural and spiritual identity. For Sikhism, Addha is not merely a taal—it is a direct connection to Guru Granth Sahib. When one listens to Addha kirtan, they experience both Punjabi culture and Sikh spirituality. Through bhangra, Addha has become a global symbol of Punjabi bounce and energy.

श्रवण-मार्गदर्शिका Listening Guide

अड्ढे को सुनते समय, इसकी विशिष्ट 'उछाल' को महसूस करें। गुरबानी किर्तन में, सुरेली आवाज़ अड्ढे की लय में ऊपर-नीचे उछलती है। भांगड़े को सुनते समय, नृत्यकार की हर चाल अड्ढे की लय के साथ संगति करती है। अड्ढे की खूबसूरती इसकी सरलता और सामर्थ्य में है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

When listening to Addha, feel its distinctive bounce. In Gurbani kirtan, the melodious voice dances up and down with Addha's rhythm. In bhangra, every dancer's movement aligns perfectly with Addha's beat. Addha's beauty lies in its simplicity and power.

अन्य विवरण

More Details

References

  • सिख धार्मिक संगीत परंपरा
  • पंजाबी लोक-संगीत के ग्रंथ
  • गुरु ग्रंथ साहिब और किर्तन-परंपरा
  • भांगड़े का इतिहास

काव्य-पंक्ति · The Couplet

अड्ढा पर शेर

अड्ढे की 'तिरकिट' में नाचता है पंजाब, हर पल, हर लय, हर सुर गुरु का उपहार।

RenderingIn Addha's 'tirkit' dances Punjab, Every moment, every beat, every note—Guru's gift. — हिंदीगीत.इन

इतिहास

History of the Cycle

उद्भव — पूर्व-मध्य काल (१५वीं-१६वीं सदी) Origin · Pre-Medieval Period (15th-16th century)

अड्ढे की उत्पत्ति पंजाबी संगीत-परंपरा से जुड़ी है, विशेषकर सिख धर्म की स्थापना के साथ। गुरु नानक देव (१४६९-१५३९) और उनके उत्तराधिकारियों ने गुरु ग्रंथ साहिब के भजनों को अड्ढे में ही संगीत-बद्ध किया।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Addha's origin is tied to Punjabi musical tradition, especially Sikhism's founding. Guru Nanak Dev and his successors set all Guru Granth Sahib shabads to Addha's rhythm.

विकास-क्रम Evolution

  1. १५वीं-१७वीं सदी अड्ढा गुरबानी संगीत का मानक ताल बन गई।
  2. १८वीं-१९वीं सदी पंजाबी लोक-संगीत परंपरा में अड्ढे का विस्तार।
  3. २०वीं सदी - आजकल भांगड़े और आधुनिक संगीत के माध्यम से विश्व-व्यापी लोकप्रियता।

पड़ाव Key Milestones

  1. 1500 गुरु ग्रंथ साहिब के शबद अड्ढे में संगीत-बद्ध गुरु ग्रंथ साहिब के शबद अड्ढे में संगीत-बद्ध
  2. 1600 अड्ढा गुरबानी परंपरा का अभिन्न अंग अड्ढा गुरबानी परंपरा का अभिन्न अंग
  3. १९७०-८०: भांगड़े का आधुनिकीकरण, अड्ढे की विश्व-व्यापी पहचान भांगड़े का आधुनिकीकरण, अड्ढे की विश्व-व्यापी पहचान

स्वर्ण काल — १६००-१९०० The Golden Period

गुरुद्वारों की स्थापना और विस्तार के साथ, अड्ढे की परंपरा प्रबल और निरंतर रहीI।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

With the establishment and expansion of gurdwaras, Addha's tradition remained strong and continuous.

आज की स्थिति Modern Status

आजकल, अड्ढा एक जीवंत, गतिशील ताल है। गुरबानी संगीत में इसका प्रयोग जारी है, और भांगड़े के विश्व-व्यापी प्रसार के कारण, अड्ढा लाखों लोगों तक पहुँचा है। यह शायद हिंदुस्तानी शास्त्रीय तालों में सबसे 'जीवित' और सांस्कृतिकभावे प्रासंगिक है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

Today, Addha is vibrant and dynamic. It continues in Gurbani music and has reached millions through bhangra's global spread. It is perhaps the most 'alive' and culturally relevant of all Hindustani classical taals.

रोचक तथ्य

Margin Notes
General

अड्ढा और तीनताल दोनों सोलह मात्रा की हैं, किंतु पूरी तरह अलग हैं।

General

अड्ढे की 'तिरकिट' तीनताल में नहीं होती — यही मुख्य अंतर है।

General

गुरु ग्रंथ साहिब के १४३०+ शबद सभी अड्ढे में हैं।

General

अड्ढा सिख धर्म के लिए उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि तीनताल हिंदू संगीत के लिए है।

General

भांगड़े की विश्व-व्यापी लोकप्रियता ने अड्ढे को भी विश्व-भर में प्रसिद्ध कर दिया है।

क्या आप जानते हैं?

Did You Know

अड्ढा 'अर्ध-तीनताल' कहा जाता है, यद्यपि यह तकनीकी रूप से तीनताल की तुलना में भिन्न है।

पंजाबी संगीत में 'अड्ढा' को कभी-कभी 'पंजाबी तीनताल' भी कहा जाता है।

अड्ढे में, 'तिरकिट' का प्रयोग अन्य ताले में कम सामान्य है।

गुरुद्वारों में, अड्ढे की लय इतनी परिचित है कि भक्त अनजाने ही इसे समझने लगते हैं।

सूक्तियाँ

Quotes

जुड़े हुए पन्ने

Connected Plates · The Graph Made Visible

अटलस में कोई पन्ना अकेला नहीं — अड्ढा से विधाएँ, राग और गीत, सब जुड़े हैं।

इन विधाओं की धड़कन · Vidhas in Addha

विधा · Vidhaगुरबानी किर्तनअड्ढा गुरु ग्रंथ साहिब के सभी भजनों (शबद) का प्राथमिक ताल है। सिख संगीत-परंपरा में यह सबसे महत्त्वपूर्ण ताल है।Gurbani Kirtanविधा · Vidhaपंजाबी लोकगीतपंजाबी परंपरागत संगीत, शादी के गीत (बिहा), और सामाजिक गीतों में अड्ढा का व्यापक प्रयोग है।Punjabi Folk Songs

राग-साथी · Raag Pairings

राग · Raagभैरवअड्ढे में भैरव राग की प्रहारपूर्ण, प्रातःकालीन प्रकृति और भी तीव्र हो जाती है।Bhairavराग · Raagभीमपलासीभीमपलासी की ऊर्जावान विशेषता अड्ढे में पूरी तरह प्रतिबिंबित होती है।Bhimpalasiराग · Raagकाफ़ीकाफ़ी की सरल, सुमधुर प्रकृति अड्ढे के साथ मिलकर लोकप्रिय गीत बनाती है।Kafi

श्रवण-कक्ष · The Listening Room

सुनिए — अड्ढा · Hear the Cycle

अड्ढा ताल — लूप और अभ्यास (गुरबानी किर्तन) — अड्ढे की विशिष्ट 'तिरकिट' को सुनते हुए निरंतर अभ्यास के लिए लूप। (20K views) Addha Taal — Loop and Practice (Gurbani Kirtan)

अड्ढा ताल — थेका और व्याख्या — अड्ढे की थेका को विस्तार से समझाया गया है, तीनताल से अंतर के साथ। Addha Taal — Theka and Explanation

अड्ढा — भांगड़े और पंजाबी संगीत में प्रयोग — अड्ढे की 'उछाल' को भांगड़े और परंपरागत पंजाबी गीतों में कैसे सुना जाता है। Addha — Application in Bhangra and Punjabi Music

गुरु ग्रंथ साहिब से प्रसिद्ध शबद (जैसे 'आसा की वार') — See recommended listening section

भांगड़े का क्लासिक संगीत — See recommended listening section

पंजाबी विवाह के गीत (बिहा, छजली) — See recommended listening section

प्रश्नोत्तर

Questions & Answers
अड्ढा क्या है?

अड्ढा एक सोलह-मात्रा की ताल है जो पंजाबी और सिख संगीत-परंपरा का दिल है। यह तीनताल के समान है (दोनों सोलह मात्रा के हैं), किंतु अड्ढे की विशिष्ट विशेषता है इसकी 'तिरकिट' — एक तेज़, तीन-बीट का अनुक्रम जो अड्ढे को तीनताल से बिल्कुल अलग करता है।

अड्ढा और तीनताल में क्या अंतर है?

दोनों सोलह मात्रा की हैं और दोनों में ४+४+४+४ की संरचना है। किंतु तीनताल में 'धिन् धिन् धिन्' का प्रयोग होता है, जबकि अड्ढे में 'धा तिरकिट धिन् ना' — इस 'तिरकिट' की वजह से अड्ढे में एक विशिष्ट 'पंजाबी उछाल' होती है।

अड्ढे की थेका क्या है?

अड्ढे की थेका है: 'धा तिरकिट धिन् ना | ता तिरकिट धिन् ना | धा तिरकिट धिन् ना | धा धा तिरकिट धिन् ना'। यह सोलह मात्रा में विभाजित है चार, चार-मात्रा के विभागों में।

गुरबानी संगीत में अड्ढा क्यों महत्त्वपूर्ण है?

अड्ढा गुरु ग्रंथ साहिब के सभी शबदों का ताल है। सिख धर्म की स्थापना के समय से ही, सभी गुरबानी संगीत अड्ढे में ही संगीत-बद्ध किए गए हैं। यह सिख धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग है।

क्या अड्ढा केवल धार्मिक संगीत में ही प्रयुक्त होता है?

नहीं। गुरबानी संगीत अड्ढे का मुख्य और सबसे पवित्र प्रयोग है, किंतु यह पंजाबी लोक-संगीत, भांगड़े, और अन्य सांस्कृतिक संगीत में भी प्रयुक्त होता है।

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सवाल-जवाब

Questions & Answers
अड्ढा क्या है? · What is Addha?

अड्ढा एक सोलह-मात्रा की ताल है जो पंजाबी और सिख संगीत-परंपरा का दिल है। यह तीनताल के समान है (दोनों सोलह मात्रा के हैं), किंतु अड्ढे की विशिष्ट विशेषता है इसकी 'तिरकिट' — एक तेज़, तीन-बीट का अनुक्रम जो अड्ढे को तीनताल से बिल्कुल अलग करता है।

अड्ढा और तीनताल में क्या अंतर है? · What is the difference between Addha and Teentaal?

दोनों सोलह मात्रा की हैं और दोनों में ४+४+४+४ की संरचना है। किंतु तीनताल में 'धिन् धिन् धिन्' का प्रयोग होता है, जबकि अड्ढे में 'धा तिरकिट धिन् ना' — इस 'तिरकिट' की वजह से अड्ढे में एक विशिष्ट 'पंजाबी उछाल' होती है।

अड्ढे की थेका क्या है? · What is the theka of Addha?

अड्ढे की थेका है: 'धा तिरकिट धिन् ना | ता तिरकिट धिन् ना | धा तिरकिट धिन् ना | धा धा तिरकिट धिन् ना'। यह सोलह मात्रा में विभाजित है चार, चार-मात्रा के विभागों में।

गुरबानी संगीत में अड्ढा क्यों महत्त्वपूर्ण है? · Why is Addha important in Gurbani music?

अड्ढा गुरु ग्रंथ साहिब के सभी शबदों का ताल है। सिख धर्म की स्थापना के समय से ही, सभी गुरबानी संगीत अड्ढे में ही संगीत-बद्ध किए गए हैं। यह सिख धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग है।

क्या अड्ढा केवल धार्मिक संगीत में ही प्रयुक्त होता है? · Is Addha used only in devotional music?

नहीं। गुरबानी संगीत अड्ढे का मुख्य और सबसे पवित्र प्रयोग है, किंतु यह पंजाबी लोक-संगीत, भांगड़े, और अन्य सांस्कृतिक संगीत में भी प्रयुक्त होता है।

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