गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate
कौन लगावे पार नैया कौन लगावे पार
Kaun Lagave Paar Naiya Kaun Lagave Paar
कौन मेरी नैया पार लगाएगा? — आत्मा की पार-यात्रा का चिरंतन नैया-पार रूपक।
भावभक्ति · दार्शनिक · आध्यात्मिक
भाषाhindi गतिमध्यम स्वरूपसमूह गान
श्रेय
The Creditsसूत्र-वाक्य · The Hook
सूत्र-वाक्य
कौन मेरी नैया पार लगाएगा? — आत्मा की पार-यात्रा का चिरंतन नैया-पार रूपक।
In EnglishWho will row my boat across? — the timeless naiya-paar metaphor of the soul's crossing.
पट्टिका-लेख
The Monographपरिचय Overview
'कौन लगावे पार नैया' 'अबला' (1941) का एक भक्ति-गीत है, जिसे ख़ुर्शीद ख़ान ने पंडित ज्ञान चंद्र की पंक्तियों पर रचा और रामदुलारी, बीनापाणि मुखर्जी तथा भवानी ने समूह-गीत के रूप में गाया। यह भक्ति के चिरस्थायी नैया-रूपक पर आधारित है — संसार-सागर के पार नैया को लगाने की ज़रूरत — समर्पण और श्रद्धा का वह भाव जो सदियों के भारतीय भक्ति-काव्य में बार-बार लौटता है।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
'Kaun Lagave Paar Naiya' is a devotional number from Abla (1941), composed by Khurshid Khan to lyrics by Pandit Gyan Chandra and sung as a group piece by Ramdulari, Binapani Mukherjee and Bhavani. It draws on the enduring bhakti metaphor of the naiya (boat) needing to be rowed across the river of existence — a motif of surrender and faith that recurs across centuries of Indian devotional verse.
वर्गीकरण
Classification- Tempo
- Medium
Genre
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| शीर्षक | कौन लगावे पार नैया कौन लगावे पार · Kaun Lagave Paar Naiya Kaun Lagave Paar |
|---|---|
| फ़िल्म | अबला · 1941 |
| वर्ष · युग | 1941 |
| गायक | Ramdulari, बीनापाणि मुखर्जी, भवानी |
| गीतकार | Pandit Gyan Chandra |
| संगीतकार | Khurshid Khan |
| स्वरूप | समूह गान |
| गति | मध्यम |
| भाषा | hindi |
| भाव | भक्ति · दार्शनिक · आध्यात्मिक |
| बोल-स्थिति | केवल झलक |
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