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जहाँ कोई तवंगर न हो (भाग २) — पनघट (1943) YouTube (click-to-load)

गीत विंग · गीत-पट्टिका · Song Plate

जहाँ कोई तवंगर न हो (भाग २)

Jaha Koi Tavangar Na Ho (Part 2)

'जहाँ कोई धनवान न हो' — एक समान संसार का स्वप्न देखता एक सामाजिक रंग का सामूहिक गीत।

भावप्रेरणादायक · दार्शनिक

भाषाhindi   गतिमध्यम   स्वरूपसमूह

श्रेय

The Credits

सूत्र-वाक्य · The Hook

सूत्र-वाक्य

'जहाँ कोई धनवान न हो' — एक समान संसार का स्वप्न देखता एक सामाजिक रंग का सामूहिक गीत।

In English'A place where no one is wealthy' — a socially tinged group song dreaming of an equal world.

पट्टिका-लेख

The Monograph

परिचय Overview

पनघट (1943) का एक बहु-स्वर गीत, सुमती, एस.एन. त्रिपाठी और अफ़ज़ल द्वारा गाया गया, रमेश गुप्ता द्वारा लिखित और एक युग्म गीत के 'भाग २' के रूप में सूचीबद्ध। 'जहाँ कोई तवंगर न हो' (एक ऐसी दुनिया जहाँ कोई धनी न हो) का भाव इसे एक सामाजिक, स्वप्नदर्शी रंग देता है जो फ़िल्म के साझा-संसाधन रूपी कुएँ के विषय से मेल खाता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

A multi-voice number from Panghat (1943) sung by Sumati, S.N. Tripathi and Afzal, written by Ramesh Gupta and listed as 'Part 2' of a paired song. The 'jaha koi tavangar na ho' (a world where none is rich) sentiment gives it a social, utopian colouring that fits the film's well-as-shared-resource theme.

संगीत The Music

एस.एन. त्रिपाठी इसे एक साझा, लगभग कोरस-सी रचना के रूप में संयोजित करते हैं, एक स्थिर मध्यम लय पर तीन आवाज़ों को बुनते हुए। लोक-फ़िल्मी परिवेश — हारमोनियम और ढोलक — इसे सहज रखता है, जबकि स्तरित आवाज़ें इसके समतावादी पाठ के अनुकूल एक सामुदायिक, गीत-गान सा भाव देती हैं।

अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English

S.N. Tripathi arranges this as a shared, almost chorus-like piece, weaving three voices over a steady medium tempo. The folk-filmi setting — harmonium and dholak — keeps it accessible while the layered voices lend a communal, anthemic feel suited to its egalitarian text.

वर्गीकरण

Classification

Genre

Filmi
Tempo
Medium

नमूना-पट्टी

The Specimen Table
गीत-नमूना · Song Specimen
शीर्षकजहाँ कोई तवंगर न हो (भाग २) · Jaha Koi Tavangar Na Ho (Part 2)
फ़िल्मपनघट · 1943
वर्ष · युग1943
गायकसुमती, S. N. Tripathi, अफ़ज़ल
गीतकारRamesh Gupta
संगीतकारS. N. Tripathi
स्वरूपसमूह
गतिमध्यम
भाषाhindi
भावप्रेरणादायक · दार्शनिक
लोकप्रियताObscure
बोल-स्थितिकेवल झलक

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