इतिहास विंग · युग-पट्टिका · Era Plate
देर मुगल काल
Late Mughal Era
दरबार से सलूनों तक — भारतीय संगीत का पुनर्जन्म · From courts to salons — the rebirth of Indian music
एक पंक्तिजब मुगल साम्राज्य पतन की ओर था, तब भारतीय संगीत ने नए रूप ग्रहण किए और आम जनता के करीब आया।
परिचय
Overviewदेर मुगल काल (लगभग 1700-1900) भारतीय संगीत के इतिहास का सबसे क्रांतिकारी और परिवर्तनकारी अध्याय है। यह वह समय था जब मुगल साम्राज्य की शक्ति क्षीण हो रही थी, लेकिन उसकी संगीत परंपरा अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में थी। दिल्ली के दरबार में ध्रुपद, खयाल और ठुमरी का विकास हो रहा था। लखनऊ, जो कि अवध की राजधानी थी, संगीत का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। यहाँ वाजिद अली शाह जैसे संगीत-प्रेमी शासकों ने ठुमरी, दादरा और नृत्य परंपराओं को जन्म दिया। बरोदा, मैसूर और त्रावणकोर जैसी रियासतें अपनी स्वयं की संगीत परंपराएं विकसित कर रही थीं। इस काल में दरबार से परे संगीत आम जनता के बीच पहुंचा। कोठे (शहरी संगीत केंद्र) और सलून संगीत के नए पीठ (केंद्र) बन गए। वेश्याएं, जिन्हें बाईजी या तवायफ कहा जाता था, संगीत की सबसे बड़ी संरक्षक और संवाहक बन गईं। तानसेन के वंशजों ने अपनी परंपराएं आगे बढ़ाईं। सारंगी, हारमोनियम, बांसुरी, सारन्ग जैसे वाद्य यंत्रों का विकास इसी काल में हुआ। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने संगीत को नई चुनौती दी, लेकिन भारतीय संगीतकार अपनी परंपरा को जीवंत रखने में सफल रहे। यह काल भारतीय संगीत के लिए परीक्षा का भी समय था। बहुत सारे गुरुकुल मिट गए। संगीतकारों को शहरों में जाना पड़ा। राजस्थान, बंगाल, महाराष्ट्र — हर क्षेत्र अपनी स्वयं की शैली विकसित कर रहा था। यहीं खयाल गायकी की बनारस घराना, आगरा घराना, पटियाला घराना जैसी परंपराएं मजबूत हुईं। इसी काल में राग संगीत का सैद्धांतिक आधार और भी पक्का हुआ। विभिन्न संगीत ग्रंथ लिखे गए। औपचारिक संगीत शिक्षा की बेहतर व्यवस्था हुई।
अंग्रेज़ी में पढ़ें · Read in English
The Late Mughal Era (approximately 1700-1900) is the most revolutionary and transformative chapter in Indian music history. This was when the Mughal Empire's power was waning, yet its musical tradition reached its finest forms. Dhrupad, Khyal, and Thumri were developing in Delhi's court. Lucknow, the capital of Awadh, became the greatest center of music. Here, music-loving rulers like Wajid Ali Shah gave birth to Thumri, Dadra, and new dance traditions. Princely states like Baroda, Mysore, and Travancore developed their own musical traditions.
During this era, music extended beyond courts into common people. Kothas (urban music centers) and salons became new seats of music. Courtesans, called Baijis or Tawaifs, became the greatest preservers and transmitters of music. Descendants of Tansen continued their traditions. Instruments like sarangi, harmonium, flute, and sitar developed during this period. British colonial rule posed new challenges, but Indian musicians s쳮ded in keeping their traditions alive.
This period was also a test for Indian music. Many gurukuls disappeared. Musicians had to move to cities. Every region — Rajasthan, Bengal, Maharashtra — developed its own style. It was during this era that Khyal singing traditions like Banaras Gharana, Agra Gharana, and Patiala Gharana became strong. The theoretical foundation of raag music became even more solid. Various music texts were written. Better formal music education systems emerged.
काव्य-पंक्ति · The Verse
काव्य-पंक्ति
नाज उठाऊं न नज़र करून तमहारी, जब लग धरे दिल की निगाहे बारार हूँ।।
— वाजिद अली शाह I neither boast nor lower my gaze, so long as my heart's vision remains steadfast.
परिभाषित विशेषताएँ
Defining Characteristicsदेर मुगल काल की संगीत की विशेषताएं: दरबार से परे संगीत का विकास, महिला संगीतकारों (बाईजियों) की प्रमुख भूमिका, नई शैलियों (ठुमरी, दादरा, कजरी) का जन्म, क्षेत्रीय घरानों का स्थापन, और ब्रिटिश औपनिवेशिकता के दबाव में संगीत का पुनर्विकास। यह काल सांस्कृतिक संघर्ष और संगीत के माध्यम से आत्मपहचान का भी काल था।
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Characteristics of Late Mughal music: development of music beyond courts, prominent role of women musicians (Baijis), birth of new forms (Thumri, Dadra, Kajri), establishment of regional traditions (Gharanas), and music's redevelopment under pressure of British colonialism. This was also a period of cultural struggle and asserting identity through music.
प्रौद्योगिकी-संदर्भ
Technological Contextइस काल में यूरोपीय वाद्य यंत्र भारत पहुंचने लगे। हारमोनियम, पियानो, वायलिन को भारतीय संगीतकारों ने अपनाया। पहली बार रिकॉर्डिंग तकनीक आई। 1902 में गौहर जान की पहली रिकॉर्डिंग भारतीय संगीत के इतिहास में एक मील का पत्थर थी। यह काल संगीत को संरक्षित करने की पहली सफल कोशिश थी। साथ ही, विभिन्न संगीत ग्रंथ लिखे गए और संगीत सिद्धांत को और औपचारिक बनाया गया।
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During this era, European instruments reached India. Harmonium, piano, and violin were adopted by Indian musicians. Recording technology arrived for the first time. Gauhar Jaan's first recording in 1902 was a milestone in Indian music history. This was the first successful effort to preserve music. Additionally, various music texts were written and music theory became more formalized.
सामाजिक संदर्भ
Social Contextदेर मुगल काल में समाज का ढांचा तेजी से बदल रहा था। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन संगीत परंपरा को खतरे में डाल रहा था। लेकिन महिला संगीतकारों (बाईजियों) ने अपने संगीत घरों को संस्कृति के केंद्र बना दिया। वे शिक्षिका थीं, नर्तकी थीं, संगीतकार थीं। वे सामाजिक दबाव के बावजूद संगीत को आगे बढ़ाती रहीं। इसी काल में संगीत शिक्षा को औपचारिक संस्थाओं के जरिए प्रदान किया जाने लगा। बनारस, आगरा, जयपुर, पटियाला — हर शहर अपनी संगीत परंपरा को गर्व से संरक्षित रख रहा था।
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During the Late Mughal era, society's structure was changing rapidly. British colonial rule threatened musical traditions. But women musicians (Baijis) made their music houses centers of culture. They were teachers, dancers, musicians. Despite social pressure, they kept advancing music. During this period, music education began to be provided through formal institutions. Banaras, Agra, Jaipur, Patiala — every city proudly preserved its musical tradition.
प्रमुख कलाकार
Key Artistsअवध के नवाब (1822-1887)। ठुमरी, कत्थक नृत्य और दादरा के जन्मदाता। खुद एक महान संगीतकार और नर्तक। उनके द्वारा रचे गए गीत आज भी मान्य और अमर हैं। लखनऊ संगीत परंपरा के प्रणेता।
Nawab of Awadh (1822-1887). Creator of Thumri, Kathak dance, and Dadra. A great musician and dancer himself. Songs he composed are still cherished and immortal. Founder of Lucknow musical tradition.
मुगल दरबार के सबसे प्रभावशाली संगीतकार। खयाल गायकी को नया रूप दिया। उनकी परंपरा आज की कई घराने परंपराओं का आधार है। खयाल गायन में तुरंत रचनात्मकता का परिचय दिया।
Most influential musician of the Mughal court. Gave new form to Khyal singing. His tradition is the foundation of many modern Gharanas. Introduced extemporaneous creativity in Khyal singing.
भारत की पहली रिकॉर्डेड संगीतकार (1902)। मां की परंपरा से सीखा। ठुमरी, दादरा, खयाल सभी में पारंगत। उनकी रिकॉर्डिंग भारतीय संगीत को संरक्षित करने की शुरुआत है। महिला संगीतकारों की आजादी और सम्मान की प्रतीक।
India's first recorded musician (1902). Learned from her mother. Master of Thumri, Dadra, and Khyal. Her recordings mark the beginning of music preservation. Symbol of women musicians' freedom and dignity.
बनारस घराने के संस्थापक। खयाल गायकी को सबसे उच्च रूप में प्रस्तुत किया। दरबार से बाहर आकर संगीत को लोकप्रिय बनाया। ख्याल गायन में तान और विस्तार की परंपरा को पक्का किया।
Founder of Banaras Gharana. Presented Khyal singing in its highest form. Brought music beyond courts. Solidified the tradition of elaborate renditions in Khyal.
मैहर घराने के संस्थापक। सितार और सुरबहार के महान वादक। संगीत शिक्षा को औपचारिक रूप दिया। विभिन्न वाद्य यंत्रों में महारत रखते थे। उनके प्रशिक्षित छात्रों ने आधुनिक संगीत को परिभाषित किया।
Founder of Maihar Gharana. Great sitar and surbahar player. Formalized music education. Mastered various instruments. His students defined modern music.
सदर अंग का भाई। खयाल गायकी में समान महारत। दोनों भाई मिलकर मुगल दरबार के सांगीतिक जीवन को परिभाषित करते थे। उनकी परंपरा भारतीय संगीत का रीढ़।
Brother of Sadarang. Equal mastery in Khyal singing. Together they defined the musical life of the Mughal court. Their tradition is the backbone of Indian music.
ऐतिहासिक गीत
Landmark Songsवाजिद अली शाह द्वारा रचित। ठुमरी के सबसे प्रसिद्ध उदाहरण। प्रकृति, प्रेम और मिलन की भावनाएं। आज भी गायी जाती है।
Composed by Wajid Ali Shah. Most famous example of Thumri. Expresses nature, love, and union. Still performed today.
देर मुगल काल में खयाल गायन का मुख्य रूप। तेजी और धीमी गति का संतुलन। दरबार में सबसे अधिक प्रस्तुत किया जाता था।
Main form of Khyal singing in Late Mughal era. Balance of fast and slow tempos. Most commonly performed in courts.
लखनऊ की परंपरा में सबसे लोकप्रिय दादरा। सरल, लेकिन भावनात्मक। स्त्री दृष्टिकोण और प्रेम को दर्शाता है।
Most popular Dadra in Lucknow tradition. Simple yet emotional. Shows feminine perspective and love.
अब्दुल करीम खाँ के द्वारा प्रस्तुत। राग भैरव की सबसे गहन व्याख्या। खयाल गायन का शास्त्रीय उदाहरण।
Presented by Abdul Karim Khan. Deepest interpretation of Raag Bhairav. Classic example of Khyal singing.
भारतीय संगीत की पहली रिकॉर्डिंग। ऐतिहासिक क्षण। संगीत को संरक्षित करने की यात्रा की शुरुआत।
First recording of Indian music. Historic moment. Beginning of music preservation.
संरक्षण-व्यवस्था
Patronage Modelदेर मुगल काल में संगीत का संरक्षण तीन स्रोतों से होता था: (1) मुगल दरबार और रियायत दरबार (जो अभी भी कुछ जगह मजबूत थे), (2) महिला संगीतकारों के संगीत घर (कोठे), जहां निजी संपन्न परिवार संगीत का आनंद लेते थे, (3) धीरे-धीरे बनने वाली नई संरचना — शहरी सामाजिक संरचना जहां भुगतान के आधार पर संगीत प्रदान किया जाता था। यह काल दरबार की पश्चिमी 'पेशेवर संगीतज्ञ' की अवधारणा की ओर संक्रमण का समय था।
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In the Late Mughal era, music was patronized by three sources: (1) the Mughal court and princely courts (which were still strong in some places), (2) women musicians' music houses (Kothas) where wealthy families enjoyed music, (3) gradually emerging new structures — urban social contexts where music was provided on a fee basis. This was a transition from court-based patronage to Western-style professional musicians.
प्रमुख नृत्य-शैलियाँ
Dance Forms Prominentवाजिद अली शाह द्वारा पुनः परिभाषित। पुरुष नर्तकों से महिला नर्तकियों (बाईजियों) का संक्रमण। अधिक आंतरिक, अधिक भावनात्मक, अधिक आघात पर केंद्रित।
Redefined by Wajid Ali Shah. Transition from male dancers to female dancers (Baijis). More intimate, more emotional, focused on texture.
त्वरित गति, तेज थाप, ताली। बनारस घराने की विशेषता। अधिक शास्त्रीय और नियंत्रित।
Fast pace, rapid rhythms, hand claps. Characteristic of Banaras Gharana. More classical and controlled.
सक्रिय परंपराएँ
Paramparas Activeठुमरी, दादरा और नृत्य का मुख्य केंद्र। नरम, भावनात्मक, आत्मीय संगीत। बाईजियों द्वारा संरक्षित और विकसित।
Main center of Thumri, Dadra, and dance. Soft, emotional, intimate music. Preserved and developed by Baijis.
खयाल गायकी का सबसे प्रसिद्ध केंद्र। अब्दुल करीम खाँ द्वारा स्थापित। तेज, तकनीकी, विस्तृत खयाल गायन।
Most famous center of Khyal singing. Established by Abdul Karim Khan. Fast, technical, elaborate Khyal renditions.
धीमी गति, गहरी भावना, आत्मनिवेदन। आगरा में विकसित। पुरानी परंपरा को संरक्षित।
Slow pace, deep emotion, self-sacrifice. Developed in Agra. Preserved old traditions.
पंजाब के राजकुमार (महाराजा भूपिंदर सिंह) द्वारा संरक्षित। तेज, आक्रामक, शक्तिशाली खयाल गायन।
Patronized by Punjab's Prince (Maharaja Bhupinder Singh). Fast, aggressive, powerful Khyal singing.
सांस्कृतिक महत्व
Cultural Significanceदेर मुगल काल में संगीत संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन गया। जब राजनीति टूट रही थी, तब संगीत समाज को जोड़े रखता था। हिंदू-मुस्लिम सदभावना का सबसे सुंदर उदाहरण इसी काल का संगीत है। सदर अंग, अदर अंग और अन्य महान संगीतकार हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। बाईजियों ने केवल संगीत नहीं सिखाया, बल्कि संस्कृति और कला को जीवंत रखा। यह काल सांस्कृतिक प्रतिरोध का भी काल था — जब विदेशी शासन सब कुछ तोड़ने का प्रयास कर रहा था, तब संगीत भारतीयता की रक्षा का हथियार बन गया। लखनऊ जहां भी था, वहां संगीत था। नृत्य, गायन, संवेदनशीलता — सब कुछ यहीं पनपा।
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During the Late Mughal era, music became the most important medium of culture. When politics was fragmenting, music held society together. The most beautiful example of Hindu-Muslim unity is the music of this era. Musicians like Sadarang and Adarang symbolized Hindu-Muslim harmony. Baijis not only taught music but kept culture and art alive. This period was also one of cultural resistance — when foreign rule tried to destroy everything, music became a weapon for protecting Indian identity. Wherever Lucknow was, there was music. Dance, singing, sensitivity — everything flourished here.
सुनने का मार्गदर्शन
The Listening Guideदेर मुगल काल के संगीत को सुनने के लिए आपको धीरज रखना चाहिए। यह तुरंत संपन्न करने वाली परंपरा नहीं है। ठुमरी को सुनिए — सुनिए कि प्रेम कैसे संगीत में घुल जाता है। दादरा को सुनिए — कितनी सरलता, कितनी गहराई। लखनऊ की परंपरा सुनिए जहां संगीत दिल से आता है, मस्तिष्क से नहीं। महिलाओं (बाईजियों) की गायकी को सुनिए — कितना साहस, कितनी स्वतंत्रता। ध्रुपद के गंभीर रूप को सुनिए। खयाल की जटिलताओं को महसूस कीजिए। यह काल अंतरंग संगीत का काल था। प्रत्येक गीत एक कहानी है, हर सुर एक भावना है।
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When listening to Late Mughal music, you should have patience. This is not a quick-gratification tradition. Listen to Thumri — hear how love dissolves into music. Listen to Dadra — such simplicity, such depth. Listen to the Lucknow tradition where music comes from the heart, not the mind. Listen to women singers (Baijis) — such courage, such freedom. Hear the profound forms of Dhrupad. Feel the complexities of Khyal. This was an era of intimate music. Every song is a story, every note an emotion.
श्रवण-कक्ष · The Listening Room
देखें-सुनें
हमारी अटरिया पे आओ — दादरा — बेगम अख़्तर · Saregama Hindustani Classical · 7:03
वो जो हम में तुम में क़रार था — ग़ज़ल — बेगम अख़्तर · Saregama Ghazal · 6:07
रोचक तथ्य
Margin Notesलखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह (1822-1887) को ठुमरी का जन्मदाता माना जाता है। वे खुद एक शानदार संगीतकार और नर्तक थे। उन्होंने कत्थक नृत्य को भी नया रूप दिया। उनके द्वारा रचे गए 'ऐ प्रिये' और 'बहार आई' जैसे गीत आज भी अमर हैं।
Nawab Wajid Ali Shah of Lucknow (1822-1887) is credited with creating Thumri. He was an accomplished musician and dancer himself. He also gave new form to Kathak dance. Songs like 'Aye Priye' and 'Bahar Aai' that he composed are still immortal.
सदर अंग और अदर अंग दो प्रसिद्ध भाई थे जो मुगल दरबार में सबसे बड़े संगीतकार थे। उन्होंने खयाल गायकी को नया आयाम दिया और ऐसी परंपरा स्थापित की जो आज भी चलती है। सदर अंग का खयाल गायन तुरंत रचनात्मक और नृत्य से जुड़ा हुआ था।
Sadarang and Adarang were two famous brothers who were the greatest musicians in the Mughal court. They gave new dimensions to Khyal singing and established a tradition that continues today. Sadarang's Khyal singing was immediately creative and connected to dance.
बनारस घराना, आगरा घराना, जयपुर घराना — ये सभी घराने इसी देर मुगल काल में विकसित हुए। हर घराने की अपनी अलग शैली, अपनी अलग परंपरा थी। ये घराने खयाल गायकी की 'परीक्षा कक्ष' थे।
Banaras Gharana, Agra Gharana, Jaipur Gharana — all these traditions developed during the Late Mughal era. Each had its own distinct style and tradition. These were the examination halls of Khyal singing.
बाईजियां या तवायफें केवल नर्तकियां नहीं थीं — वे संगीत की रक्षक थीं। जब दरबार टूटने लगे, तब बाईजियों ने संगीत को अपने घरों में सुरक्षित रखा। उन्होंने न केवल ठुमरी, दादरा, और कजरी को सीखा-सिखाया, बल्कि एक पूरी संस्कृति को जीवंत रखा।
Baijis or Tawaifs were not merely dancers — they were guardians of music. When courts began to collapse, Baijis preserved music in their homes. They not only learned and taught Thumri, Dadra, and Kajri, but kept an entire culture alive.
हारमोनियम इसी काल में भारत में आई। शुरुआत में इसे 'विलायती' (विदेशी) माना जाता था, लेकिन भारतीय संगीतकारों ने इसे अपनी संगीत प्रणाली में ढाल दिया। आज हारमोनियम हिंदुस्तानी संगीत का अभिन्न अंग है।
The harmonium arrived in India during this period. Initially, it was considered 'foreign,' but Indian musicians adapted it to their musical system. Today, the harmonium is an integral part of Hindustani music.
क्या आप जानते हैं?
Did You Knowमुगल दरबार के सबसे महान संगीतकार तानसेन (1506-1589) के वंशज देर मुगल काल में भी अपनी परंपरा जारी रखे। तानसेन की परंपरा से ही आज की कई घराने परंपराएं निकली हैं।
Descendants of Tansen, the greatest musician of the Mughal court (1506-1589), continued their tradition during the Late Mughal era. Many of today's gharana traditions trace back to Tansen's lineage.
औपचारिक संगीत शिक्षा की व्यवस्था इसी काल में हुई। पहला संगीत विद्यालय कोलकाता में खुला। संगीत को विज्ञान और कला दोनों के रूप में स्वीकार किया जाने लगा।
Formal music education systems emerged during this era. The first music schools opened in Calcutta. Music began to be recognized as both science and art.
रियायत संगीत (court music) को 'शास्त्रीय संगीत' कहा जाने लगा। लोक संगीत से अलग, यह एक उच्च कला मानी जाने लगी। यह विभाजन भी इसी काल में पक्का हुआ।
Court music began to be called 'classical music.' Distinct from folk music, it was considered a higher art. This division solidified during this era.
सूक्तियाँ
Words of the Masters“संगीत ही एक ऐसी भाषा है जो सभी भाषाओं से परे है। जब दिल को सुनने की इच्छा हो, तो संगीत सुनो।”
— — वाजिद अली शाह, Late Mughal period wisdom“Music is a language beyond all languages. When the heart wishes to be heard, listen to music.”
“ठुमरी केवल संगीत नहीं है, यह प्रेम की अभिव्यक्ति है। हर नोट एक शिकायत है, हर स्वर एक विनती है।”
— — लखनऊ की संगीत परंपरा, Thumri philosophy“Thumri is not just music, it is an expression of love. Every note is a complaint, every svar a plea.”
“एक अच्छा संगीतकार वह नहीं जो सब कुछ जानता है, बल्कि वह है जो अपनी आत्मा को संगीत से जोड़ता है।”
— — भारतीय संगीत परंपरा, Gharana teachings“A good musician is not one who knows everything, but one who connects their soul to music.”
सवाल-जवाब
Questions & Answersठुमरी क्या है और यह कहां से आया?
ठुमरी एक हल्की, भावनात्मक संगीत शैली है जो लखनऊ में विकसित हुई। यह वाजिद अली शाह के काल में (19वीं सदी) जन्मी। ठुमरी प्रेम, विरह, मिलन और प्रकृति पर केंद्रित है। इसमें बोल (शब्द) को संगीत से समान महत्व दिया जाता है। यह आम जनता का संगीत है, दरबार का नहीं।
बाईजी क्या थीं और उन्होंने संगीत में क्या भूमिका निभाई?
बाईजी या तवायफ महिला संगीतकार और नर्तकी थीं जो आमतौर पर शहरों में रहती थीं। वे संगीत सलूनों और निजी समारोहों में प्रदर्शन करती थीं। जब मुगल दरबार टूटने लगे, तब बाईजियों ने अपने घरों को संगीत के केंद्र बना दिया। वे ठुमरी, दादरा, कजरी की सबसे बड़ी गायिकाएं थीं। समाज के दबाव के बावजूद, उन्होंने संगीत परंपरा को सुरक्षित और विकसित रखा। गौहर जान, मलिनी राजुरकर, गिरिजा देवी — ये सभी इसी परंपरा की हैं।
खयाल गायकी के विभिन्न घराने कौन से हैं?
देर मुगल काल में खयाल गायकी के चार मुख्य घराने विकसित हुए: (1) लखनऊ घराना — नरम, भावनात्मक, आत्मीय; (2) बनारस घराना — तेज, तकनीकी, विस्तृत; (3) आगरा घराना — धीमी गति, गहरी भावना; (4) जयपुर घराना — बनारस जैसा लेकिन अपनी विशेषता के साथ। हर घराने की अपनी शैली, अपनी बोल परंपरा, अपनी राग प्रस्तुति है।
इतिहास
The Historyउत्पत्ति — लगभग 1700 Origin
जब मुगल साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा, तब संगीत परंपरा अपने सबसे मजबूत रूप में थी। दिल्ली के दरबार में संगीत का प्रवाह अविरत था, लेकिन धीरे-धीरे संगीत दरबार के बाहर निकलने लगा। लखनऊ, बनारस, आगरा, जयपुर — हर शहर ने अपनी स्वयं की संगीत परंपरा विकसित करने लगी। यह विकेंद्रीकरण संगीत के लिए वरदान साबित हुआ। एक ही परंपरा बहुत सारी परंपराओं में बिखर गई, लेकिन हर परंपरा अपनी अलग विशेषता के साथ जीवंत रही।
विकास-यात्रा · Evolution
- प्रारंभिक देर मुगल काल (1700-1800) दिल्ली के दरबार से संगीत विकेंद्रित होना शुरू। लखनऊ की नई परंपरा का जन्म। खयाल, ठुमरी जैसी शैलियों का विकास। महिला संगीतकारों की भूमिका बढ़ना।
- मध्य देर मुगल काल (1800-1850) वाजिद अली शाह का शासन। ठुमरी, दादरा, कजरी का सुनहरा काल। कत्थक नृत्य का नया रूप। संगीत सलूनों का समृद्धि का समय।
- अंतिम देर मुगल काल (1850-1900) ब्रिटिश औपनिवेशिकता का असर। संगीत संस्थाओं का गठन। पहली रिकॉर्डिंग तकनीक। संगीत को विज्ञान के रूप में औपचारिक अध्ययन। नई परंपराओं की स्थापना।
प्रमुख पड़ाव · Key Milestones
- 1700 मुगल साम्राज्य की कमजोरी और संगीत का विकेंद्रीकरण
- 1775 अवध के नवाब अली बहादुर द्वारा संगीत का संरक्षण और लखनऊ की संगीत परंपरा का प्रारंभ
- 1822 वाजिद अली शाह का जन्म और ठुमरी का सुनहरा काल
- 1857 भारतीय विद्रोह और ब्रिटिश दमन, लेकिन संगीत परंपरा का जीवंत रहना
- 1902 गौहर जान की पहली रिकॉर्डिंग — भारतीय संगीत को संरक्षित करने की शुरुआत
नमूना-पट्टी
The Specimen Table| नाम | देर मुगल काल · Late Mughal Era |
|---|---|
| काल | लगभग 1700 |
| प्रकार | युग · Eras |
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