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नज्मुल हसन और देविका रानी — 'जवानी की हवा' (1935) का दृश्य
नज्म-उल-हसन — अभिनेता wikimedia · Public Domain

कलाकार विंग · कलाकार-पट्टिका · Artist Plate

नज्म-उल-हसन

Najm-ul-Hassan

भूमिकाअभिनेताजीवन1980

जन्मLucknow region (descended from Lucknow nobility)

निधन1980

जीवन-पट्टी

The Life Specimen
जीवन-नमूना · Life Specimen
नामनज्म-उल-हसन · Najm-ul-Hassan
जन्मLucknow region (descended from Lucknow nobility)
निधन1980
भूमिकाएँअभिनेता

पट्टिका-लेख

The Monograph

जीवनी Biography

नज्म-उल-हसन (मृत्यु 1980, लाहौर) — 1930 के दशक के बॉम्बे टॉकीज़ अभिनेता, जिनका नाम हिंदी सिनेमा के पहले बड़े कांड के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया। लंबे-छरहरे, सुदर्शन और लखनवी कुलीन परिवार से आए नज्मुल — कानून की पढ़ाई बीच में छोड़कर मुंबई आए और हिमांशु राय की बॉम्बे टॉकीज़ की पहली फ़िल्म 'जवानी की हवा' (1935) में देविका रानी के नायक 'रतनलाल' बने। अगली फ़िल्म 'जीवन नैया' (1936) की शूटिंग के दौरान वे और देविका रानी कलकत्ता भाग गए — यह घटना भारतीय सिनेमा का पहला बड़ा प्रेम-कांड बनी। हिमांशु राय ने ध्वनि-अभियंता शशधर मुखर्जी के ज़रिए देविका रानी को वापस बुलाया, नज्मुल को निकाल दिया और उनकी जगह प्रयोगशाला-सहायक कुमुदलाल गांगुली को नायक बनाया — जो आगे चलकर अशोक कुमार कहलाए। एक ही फ़ैसले ने एक करियर डुबोया और दूसरा रच दिया।

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Death Year
1980

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